वैसे तो शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग 10,000 रुपए से भी शुरू की जा सकती है। लेकिन ट्रेडिंग से प्रतिमाह 50,000 रुपए कमाना चाहते हैं तो कम से कम 5 लाख रुपए की पूंजी होनी चाहिए। प्रतिमाह 10% नियमित कमाना कोई मामूली बात नहीं। आप सचमुच ट्रेडिंग के उस्ताद बन गए हैं, तभी इतना कमाने की उम्मीद पाल सकते हैं। हालांकि शेखचिल्ली तो महीने भर में दुगुना-तिगुना कमाने का भी मंसूबा पाल सकते हैं। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

ट्रेडिंग सिस्टम में तेज़ी-मंदी दोनों से पार पाने की क्षमता होनी चाहिए। मतलब, आपको शॉर्ट सेलिंग भी आनी चाहिए। तभी आप बाज़ार से गिरने के दौर में कमा सकते हैं। शॉर्ट सेलिंग केवल फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस सेगमेंट में की जा सकती है। चूंकि कम पूंजी है तो आपके पास ऑप्शंस को ही आजमाने का विकल्प बचता है। लेकिन ट्रेडिंग किसी सेगमेंट में करें, हर हाल में आपको अपनी ट्रेडिंग पूंजी बचाकर चलना होगा। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

काम का ट्रेडिंग सिस्टम आपके अनुरूप होने के साथ-साथ सरल होना चाहिए। लेकिन उसमें बाजार की जटिलताओं को पकड़ने का दमखम होना ज़रूरी है। दरअसल, जटिलताओं को हम जितना सुलझा लेते है, सिस्टम उतना ही आसान या सरल होता चला जाता हैं। जटिल सिस्टम किसी को भरमाने के काम आ सकता है, ट्रेडिंग से कमाने में नहीं। उस सिस्टम में तेज़ी और मंदी दोनों के बाज़ार से पार पाने की क्षमता होनी चाहिए। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

जीवन, युद्ध या ट्रेडिंग में कोई भी रणनीति हमें अपनी सीमाओं और संसाधनों को ध्यान में रखते हुए बनानी चाहिए। अन्यथा हम नाकाम होने को अभिशप्त हैं। वित्तीय बाज़ार में ट्रेडिंग का मूल मकसद है कम से कम रिस्क और कम से कम समय में अधिकतम कमाना। इसके लिए हम किसी को अपने टेम्परामेंट के हिसाब से ट्रेडिंग सिस्टम बनाना होता है। यहां तक ट्रेडिंग के स्टॉक्स भी अपने माफिक चुनने होते हैं। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

इस साल कोरोना संकट के उभरने के बाद विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक हमारे शेयर बाज़ार में अब तक 1.20 लाख करोड़ रुपए लगा चुके हैं। इसी दौरान रिलायंस ने जियो प्लेटफॉर्म और रिटेल उद्यम के लिए विदेशियों से 2.07 लाख करोड़ रुपए जुटाए हैं। आखिर विदेशी निवेशकों के पास इतना इफरात धन कहां से आ रहा है और वे क्यों पिछले छह सालों में तबाह हो चुकी भारतीय अर्थव्यवस्था पर दांव लगा रहे हैं? अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

कोविड-19 के प्रकोप के बाद दुनिया के वित्तीय जगत का विचित्र हाल है। तमाम देशों के केंद्रीय बैंकों द्वारा छापे गए नोटों से उपजे सस्ते धन का प्रवाह भारत जैसे देशों के शेयर बाज़ारों में आ रहा है। पिछले नौ महीनों में हमारे बाज़ार में इतना विदेशी धन आया है, जितना पिछले बारह सालों में नहीं आया था। हमारे कैश सेगमेंट में एफआईआई/एफपीआई निवेश कोरोना के मामलों जैसी रफ्तार से बढ़ता ही गया। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

शेयर बाज़ार शिखर से नए शिखर की यात्रा पर निकल चुका है। निफ्टी-50 सूचकांक 23 मार्च को कोरोना-कहर में तलहटी पकड़ने के बाद अब तक 68.34% बढ़ चुका है। ध्यान रहे कि दो ही कारकों से शेयरों के भाव और बाज़ार सूचकांक बढ़ते हैं। एक, धन का प्रवाह और दो, बाजार में लिस्टेड कंपनियों की बिजनेस बढ़ाने की क्षमता। कोरोना काल में दूसरा कारक दम तोड़ चुका है। केवल पहला कारक हावी है। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

बाज़ार में बवाल। निफ्टी-50 नए ऐतिहासिक शिखर पर। अभी कितना और चढ़ सकता है? वह 35 के पी/ई तक चला गया तो सेंसेक्स पहले 50 तक के पी/ई तक जा चुका है। निवेशक फिलहाल एक रुपए की कमाई पर 35 रुपए दे रहे हैं तो पहले इसकी खातिर 50 रुपए भी दे चुके हैं। सवाल उठता है कि जब अर्थव्यवस्था में हर तरफ मुर्दनी छाई है, कंपनियां लस्त-पस्त हैं, तब ऐसी मदहोशी क्यों? अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

शेयर बाज़ार में उफान छाया है। निफ्टी अब तक के ऐतिहासिक शिखर से मात्र 2.25% दूर है। यही नहीं, पिछले महीने 14 अक्टूबर को निफ्टी का पी/ई अनुपात 34.87 के सर्वोच्च स्तर तक चला गया था। मतलब, निवेशक निफ्टी-50 में शामिल कंपनियों की 1 रुपए औसत कमाई के लिए 34.87 रुपए दाम देने को तैयार हैं। निफ्टी के लंबे समय के पी/ई का औसत 20 है। आखिर, औसत से 75% ज्यादा दाम क्यों? अब सोम का व्योम…औरऔर भी

आप शेयर बाज़ार की ट्रेडिंग से अपना और घर-बार का ठीकठाक गुजारा करना चाहते हैं तो महीने में औसतन एक लाख रुपए कमाने होंगे। इस पर बिजनेस का टैक्स भी लगेगा। महीने में 20 दिन ट्रेडिंग तो ऐसे हर दिन आपको 5000 रुपए कमाने होंगे। लेकिन हर दिन इतना कमा नहीं सकते। कभी घाटा, कभी फायदा। इसलिए दिन में कई बार सौदे काटने और करने पड़ेंगे तो निफ्टी या बैंक निफ्टी नहीं जमेंगे। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी