अगर आप बूढ़े व अशक्त नहीं हैं और पहाड़ चढ़ रहे हों तो बड़ा छोड़कर छोटा रास्ता अपनाते हैं, भले ही वहां पैर फिसलने का जोखिम हो। दरअसल, मानव मस्तिष्क के तार जुड़े ही ऐसे हैं कि हम स्वभावतः शॉर्टकट को तरजीह देते हैं। लेकिन लंबे निवेश में शॉर्टकट की मानसिकता बेहद नुकसानदेह साबित होती है। इसलिए हमें संयम और अनुशासन से खुद को शॉर्टकट की तरफ जाने से रोकना पड़ता है। अब आज की चुनिंदा कंपनी…औरऔर भी

केवल कंपनियां ही पूंजी व श्रम के सहयोग से अर्थव्यवस्था में मूल्य जोड़ती हैं। बाकी सब व्यापार का चक्र और मुद्रा की फेटमबाज़ी है। इसीलिए कोई बैंक एफडी, यहां तक कि इनफ्लेशन इंडेक्स बांड भी मुद्रास्फीति को नहीं हरा सकते। केवल और केवल कंपनियों के मालिकाने में हिस्सेदारी यानी इक्विटी में निवेश से हम अपनी बचत को मुद्रास्फीति की मार से बचाकर बढ़ा सकते हैं, बशर्ते सही कंपनियां चुनी जाएं। तथास्तु में एक और ऐसी ही कंपनी…औरऔर भी

हर दिन राजनीति में नया बवाल। कतई साफ नहीं कि 2014 में देश में किसकी सरकार बनेगी। बहुतेरे निवेशक भविष्य की इस अनिश्चितता को लेकर परेशान हैं। पर सच यह है कि आखिरकार काम-धंधा और व्यापार ही राजनीति पर हावी पड़ते हैं। अगर भरोसा हो कि भारतीय अर्थव्यवस्था को अभी बहुत आगे जाना है तो निवेश के आकर्षक मौके मौजूद हैं। आज एक ऐसा ही मिड कैप स्टॉक पेश है जो आपका धन दोगुना कर सकता है…औरऔर भी

जिस चीज़ की मांग न हो, उसका आप कितना भी ढिढोरा पीट लें, वो चीज़ और उसे बनानेवाली कंपनी बाज़ार में कभी टिक नहीं सकती। लेकिन जिस चीज़ की जबरदस्त मांग हो और कोई कंपनी बहुत सलीके से उसे बराबर बना रही हो, उसको जमने से कोई रोक नहीं सकता। आज तथास्तु में लंबे निवेश के लिए पेश है ऐसी ही एक कंपनी। इस कंपनी का बिजनेस मॉडल बड़ा मजबूत है। लेकिन है यह एक लार्ज-कैप कंपनी…औरऔर भी

सालों-साल से ट्रकों के पीछे लिखा रहता है देखो मगर प्यार से। लेकिन शेयर बाज़ार ऐसी चीज़ है जिसे देश के 92% लोग हिकारत से देखते हैं। बाकी लोग प्यार नहीं, लालच की नज़र से देखते हैं। सोचते और पूछते हैं कि बाज़ार कल या छह महीने बाद कहां तक जाएगा। असल सवाल उन्हें पूछना चाहिए कि जिस कंपनी का शेयर खरीद रहे हैं, उसका धंधा कहां जाएगा। ऐसा सोचना आवश्यक है। अब आज का लंबा निवेश…औरऔर भी

शेयर बाज़ार भले ही पिछले हफ्ते मंगल को छोड़कर हर दिन बढ़ा हो। पर सच यही है कि हमारी अर्थव्यवस्था की हालत अच्छी नहीं है। फिर, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बांड खरीद घटने या रुकने से भारत समेत दुनिया भर के बाज़ार गिर सकते हैं। ऐसी सूरत में हमें उन्हीं कंपनियों में निवेश करना चाहिए जो मूलभूत रूप से काफी मजबूत हैं और बदतर हालात में भी अच्छी कमाई करती हैं। तथास्तु में ऐसी ही एक कंपनी…औरऔर भी

शुक्रवार शाम शेयर बाज़ार पर आयोजित एक सेमिनार में गया था ताकि कुछ नया सीख सकूं और आपको सर्वोत्तम सलाह दे सकूं। वहां 60-65 साल के एक परेशान निवेशक ने तैश में आकर कहा कि जिस किसी से सात जन्मों की दुश्मनी निकालनी हो, उसका पैसा शेयरों में लगवा देना चाहिए। बड़े कड़वे अनुभव से गुजरी है उनकी पीढ़ी। आज भी मूल फिक्र पूंजी बढ़ाने से ज्यादा, उसे बचाने की है। इसलिए आज एक सुरक्षित लार्जकैप स्टॉक…औरऔर भी

वजह बाहरी हो या भीतरी, हकीकत यही है कि अपने यहां अभी एक शेयर 52 हफ्ते के शिखर पर है तो आठ तलहटी पर। गिरनेवालों में एसीसी, सेंचुरी प्लाई, ग्रासिम इंडस्ट्रीज़ और अल्ट्राटेक सीमेंट जैसे तमाम दिग्गज शामिल हैं। क्या तलहटी पर पहुंचा हर शेयर खरीदने लायक है? नहीं। बस नाम व दाम के पीछे भागे तो वैल्यू ट्रैप में फंस जाएंगे। हमें चुननी होगी मजबूत आधार और अच्छे प्रबंधन वाली कंपनी। लीजिए, ऐसी ही एक कंपनी…औरऔर भी

शुक्रवार को सेंसेक्स के 769.41 अंक (3.97%) व निफ्टी के 234.45 अंक (4.08%) गिरने से अफरातफरी मची है हर तरफ। कहा जा रहा है कि अब गिरावट की तगड़ी मार बाज़ार को झेलनी पड़ेगी। लेकिन दुनिया भर के सफलतम निवेशकों का अनुभव बताता है कि हर बड़ी गिरावट अच्छे स्टॉक्स को सस्ते में खरीदने का बेहतरीन मौका है। लेकिन ऐसे स्टॉक्स को पहचानें कैसे? इसके लिए हम लेकर आए हैं सबसे भरोसमंद सेवा, सबसे सस्ते मूल्य पर…औरऔर भी

निवेशकों को उन्हीं कंपनियों में अपनी बचत लगानी चाहिए जिन्हें वे जानते हों। खासकर तब, जब हवा का रुख उल्टा हो, दिग्गज कंपनियों तक के शेयर पिट रहे हों, तब उन्हें ऐसी कंपनियों को चुनना चाहिए जो मजबूत धरातल पर खड़ी हों। आर्थिक दुविधा और गिरावट के दौर में अपना होमवर्क भी बेहद जरूरी है। यह न केवल अपनी संपदा को बढ़ाने, बल्कि उसे बचाने के लिए भी आवश्यक है। पेश है ऐसी ही एक लार्जकैप कंपनी…औरऔर भी