बाज़ार कभी हमारे हिसाब से नहीं चलता। हमें ही बाज़ार के हिसाब से चलना पड़ता है। तभी हम उससे कमा पाते हैं। हम आगे बढ़कर अनुमान ज़रूर लगाते हैं। लेकिन मानकर चलते हैं कि अनुमान गलत भी हो सकता है। तभी तो स्टॉप-लॉस या पोजिशन साइजिंग के ज़रिए रिस्क को बांधकर चलते हैं। वैसे, लंबे निवेश के लिए अभी मौज का दौर है क्योंकि तमाम मजबूत स्टॉक्स गिरे पड़े हैं। तथास्तु में ऐसी ही एक दमदार कंपनी…औरऔर भी

कोयल कभी घोंसला नहीं बनाती। वो बड़ी चालाकी से अपने अंडे कौए के घोंसले में डाल देती है। शेयर बाज़ार में निवेश करना ऐसा ही है। बस ‘कौए’ की सही पहचान होनी चाहिए। ऐसा न हो कि वो आपका ‘अंडा’ ही खा जाए। बुरी कंपनियां निवेशकों की दौलत खा जाती हैं, जबकि अच्छी कंपनियां शेयरधारकों की दौलत बराबर बढ़ाती जाती हैं। आज तथास्तु में ऐसी कंपनी जिसने 37 सालों में दिया है 21% का सालाना चक्रवृद्धि रिटर्न…औरऔर भी

भारत विशाल संभावनाओं वाला देश है। प्रकृति की जैसी कृपा व संपदा हमारे पास है, जैसा इंसानी जीवट देश के कोने-कोने तक फैला है, उसके आपसी मेल से भारत कहीं का कहीं पहुंच सकता है। और, इस मेल-मिलाप व सहयोग का मंच बाज़ार उपलब्ध कराता है। सरकार इसके खिलने में बाधा न डाले, माकूल नीतियों से इसे प्रेरित करे तो बाकी काम अवाम की उद्यमशीलता कर डालती है। इसी का नमूना है तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

बचत सही जगह नहीं लगाई तो उसे मुद्रास्फीति की दीमक खा जाएगी। निवेश का मूल मकसद मुद्रास्फीति को काटना है। बैंक एफडी सुरक्षित है। लेकिन साल का 9% भी ब्याज मिले तो 10% टैक्स कटने के बाद रिटर्न 8.1% रह जाता है। वहीं, लिस्टेड कंपनी में निवेश करें और एक साल बाद बेचकर जितना भी फायदा कमाएं, उस पर टैक्स नहीं लगता। ऊपर से वो 8.2% लाभांश दे तो क्या कहने! आज तथास्तु में यही दिलदार कंपनी…औरऔर भी

13-14 साल पहले तक कंपनियों के आईपीओ नहीं, पब्लिक इश्यू आया करते थे। तब कंट्रोलर ऑफ कैपिटल इश्यूज़ शेयरों का इश्यू मूल्य तय किया करता था जो अमूमन कम होते थे और आम निवेशक पब्लिक इश्यू से अच्छा कमाते थे। अब तो आईपीओ वेंचर कैपिटल या प्राइवेट इक्विटी फंडों के निकलने का ज़रिया बन गए हैं तो भाव पहले से चढ़े होते हैं। इसलिए हमें आईपीओ से दूर ही रहना चाहिए। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

लहलहाती फसल देख मन ललचा जाता है कि काश, ये खेत अपना होता। शानदार बंगला देखकर लगता है कि इसके मालिक होते तो मज़ा आ जाता। लेकिन इनके मालिकाने की एक रत्ती भी पाने की गुंजाइश नहीं होती। वहीं, लिस्टेड कंपनियों के मालिकाने का अंश हम शेयरों के ज़रिए खरीद सकते हैं। लेकिन खरीदें तभी जब मन में आए कि कितनी सॉलिड कंपनी है। काश, हम भी इसके मालिक होते! अब तथास्तु में ऐसी ही एक कंपनी…औरऔर भी

निवेश में सफलता के लिए धैर्य से कहीं ज्यादा ज़रूरी है जिस कंपनी में आप निवेश कर रहे हैं, उसकी समझ। अक्सर हम ब्रोकर या किसी जान-पहचान वाले के कहने पर शेयर खरीद लेते हैं। इतना भर देखते हैं कि वो ज्यादा महंगा तो नहीं। आगे होता यह है कि हम साल-दर-साल इंतज़ार किए जाते हैं। लेकिन वो शेयर गिरते-गिरते रसातल तक पहुंच जाता है, बढ़ने का नाम ही नहीं लेता। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

कंपनी का शेयर 1.4 के पी/ई और 0.2 के पी/बी अनुपात पर ट्रेड हो रहा हो, उसका ऋण-इक्विटी अनुपात 0.7 हो और सालाना लाभांश यील्ड 17.7% हो तो किसी भी निवेशक का मन उसमें धन लगाने को ललचा जाएगा। पर, आईटी कंपनी हेलियोज़ एंड मैथेसन इतना होने के बावजूद न तो जमाकर्ताओं का धन और न कर्मचारियों का वेतन समय से दे पा रही है। इसलिए अंश नहीं, संपूर्ण को देखना ज़रूरी है। अब आज का तथास्तु…औरऔर भी

सरकारी बांडों या बैंकों की एफडी में निवेश सुरक्षित माना गया है क्योंकि उनका वास्ता सरकार की नीति, देश की आर्थिक स्थिति, रिजर्व बैंक और मौद्रिक नीति से होता है। हालांकि इनमें से भी रिस्क होता है। पर दुनिया भर में सरकार से जुड़े प्रपत्रों को रिस्क-मुक्त माना जाता है। वहीं, जब हम किसी कंपनी में निवेश करते हैं तो उसका बढ़ना-घटना उसके अपने कामकाज़ से जुडा होता है। आज तथास्तु में पेश है एक सरकारी कंपनी…औरऔर भी

शेयरों में निवेश से हमें एक नहीं, दो फायदे मिलते हैं। दिक्कत यह है कि अमूमन हम यही सोचते हैं कि जिस भाव पर खरीदा है, उससे कुछ साल बाद हमें ज्यादा भाव मिल जाएगा, कम से कम इतना कि मुद्रास्फीति का असर मिटा देगा। लेकिन दूसरा फायदा भी उतना ही महत्वपूर्ण है जो हमें बतौर लाभांश मिलता है। इसलिए हमें कंपनी के लाभांश-रिकॉर्ड को भी तरजीह देनी चाहिए। आज तथास्तु में  लाभांश देनेवाली एक मजबूत कंपनी…औरऔर भी