वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग में घाटे से बचना मुमकिन नहीं। लेकिन घाटे को हम न्यूनतम ज़रूर रख सकते हैं। इसके लिए उबाल खाती भावनाएं नहीं, फौलादी अनुशासन चाहिए। किसी एक सौदे में 1.5-2% से ज्यादा घाटे से बचें क्योंकि यह हमारे मन-धन दोनों को तोड़ता है। वहीं, दस में से छह सौदों में 2-2% घाटा लगा, बाकी चार में 6-6% फायदा हुआ, तब भी हम कुल मिलाकर 12% मुनाफा कमा लेंगे। अब परखते हैं सोमवार का व्योम…औरऔर भी

वित्तीय बाज़ार एक ऐसी जगह है जहां आप बहुत सारी गलतियां करना गवारा नहीं कर सकते क्योंकि गलतियां आपका मनोबल ही नहीं गिरातीं, बल्कि आपकी ट्रेड़िंग पूंजी भी उड़ा ले जाती हैं। मसकद है पूंजी को डूबने से बचाना। सो, यहां अपनी ही नहीं, दूसरों की गलतियां से भी बराबर सीखते रहना ज़रूरी है। दिक्कत यह है कि हम दूसरों की सफलताओं के पीछे तो भागते हैं, उनकी गलतियों से सबक नहीं लेते। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी

हर हाल में जीतने की अदम्य इच्छा सहज इंसानी प्रवृत्ति है। शायद इसीलिए हम ट्रेडिंग में भी अचूक मंत्र तलाशते फिरते हैं। हाल ही में एक सज्जन मिले जो इसके लिए किसी कर्ण पिशाचिनी मंत्र साधना की बात कर रहे थे। दोस्तों! मन में कहीं गहरे बैठा लें कि ट्रेडिंग में कामयाबी का कोई अचूक मंत्र नहीं है। यह विशुद्ध रूप से प्रायिकता का खेल है। इसमें 60-65% कामयाबी अभीष्टतम है। अब तलाशते हैं गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

किसी भी समाज का मनोविज्ञान रातोंरात नहीं बदलता। इसकी कुछ झलक हमें वित्तीय बाज़ार में भावों व वोल्यूम के चार्ट में नज़र आती है। बाकी सारे इंडीकेटरों की गणना इन्हीं दो आंकड़ों को मिलाकर की जाती है। पहले जो हुआ है, आगे भी उसके होने की संभावना ज्यादा होती है। इसी सोच के आधार पर समझदार लोग बाज़ार की भेड़चाल को पकड़ते हैं और कभी कमाते तो कभी चूक जाते हैं। अब आजमाते हैं बुध की बुद्धि…औरऔर भी

निर्मल बाबा को बेनकाब हुए तीन साल हो गए। फिर भी तमाम न्यूज़ चैनल दोपहर में उनका घंटे-घंटे भर का कार्यक्रम चलाते हैं क्योंकि उन्हें विज्ञापन की कमाई से मतलब है, न कि मासूम लोगों को ठगे जाने से। हमारे बिजनेस चैनल इसी अंदाज़ में शेयर बाज़ार के ‘बाबाओं’ को पेश करते हैं। फाइनेंस की दुनिया के इन फ्रॉडों की एंकर-गण ऐसी स्तुति करते हैं, जैसे सामने साक्षात भगवान बैठे हों। अब निकालते हैं मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

बाज़ार में सफलता के लिए सामान्य बुद्धि का होना काफी है। लेकिन इसके साथ असामान्य मिज़ाज ज़रूरी है। बॉरेन बफेट की यह बात निवेश के साथ-साथ ट्रेडिंग पर भी लागू होती है। अगर आपने शांत और अनुशासित रहना अपने स्वभाव का हिस्सा बना लिया है तो आप ट्रेडिंग में आज नहीं तो कल ज़रूर कामयाब होंगे। लेकिन ज़रा-सी बात पर उछलते भड़कते रहे तो आपको डूबने से कोई नहीं बचा सकता है। अब परखें सोम का व्योम…औरऔर भी

यह सृष्टि, दुनिया और समाज आपसी निर्भरता पर टिका है। इसलिए यहां अपने-पराये की पहचान बेहद ज़रूरी है। नहीं तो कब हम दूसरे का निवाला बन जाएंगे, पता नहीं चलेगा। ट्रेडिंग के संदर्भ में गांठ बांध लें कि ब्रोकर या बिजनेस चैनलों के एनालिस्ट कभी भी अपने नहीं हो सकते। उनका स्वार्थ हमारा शिकार करने से सधता है। दूसरे, यहां किसी को गुरु मत बनाओ। उनसे केवल इनपुट लो और करो खुद। अब लगाएं बुध की बुद्धि…औरऔर भी

वित्त वर्ष 2014-15 का आखिरी दिन। बैंकों से लेकर म्यूचुअल फंडों व तमाम वित्तीय संस्थाओं के लिए खातों को अंतिम रूप देने का दिन। सो, आज उनके ट्रेडिंग व्यवहार पर खास ध्यान देना चाहिए। खुद कुछ न करके उनकी हरकतों को देखना, समझना भविष्य में ज्यादा काम का साबित हो सकता है। असल में ट्रेडिंग में सही समझ ही हमारा सबसे बड़ा हथियार है। बाकी सब में तो संस्थाएं बलशाली हैं। अब परखते हैं मंगल की दृष्टि…औरऔर भी

ट्रेन्ड के साथ चलनेवाले कम कमाते हैं। वहीं, ट्रेन्ड के खिलाफ चलनेवाले या तो जमकर कमाते हैं या डूब जाते हैं। डूबते तब हैं, जब दुस्साहसी भावुकता में आंख मूंदकर रिस्क लेते हैं। गंवाते कम और कमाते तब ज्यादा हैं जब रिस्क को बांधकर चलते हैं। लेकिन जीवन की तरह ट्रेडिंग में भी लीक के खिलाफ चलने के लिए भरपूर माद्दा चाहिए। ऐसे लोग बड़ा नाम और नामा कमाते हैं, बशर्ते समझदारी अपनाएं। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

निफ्टी कल गिरता-गिरता शाम तीन बजे के ठीक बाद 2.41% नीचे में 8325.35 तक चला गया और अंत में वहां से ज़रा-सा उठकर 2.21% की गिरावट के साथ 8342.15 पर बंद हुआ। वैसे, निफ्टी के पिछले पैटर्न को देखकर हमने सोमवार को सुबह ही कह दिया था: निफ्टी को थोड़ा समर्थन 8550 के आसपास मिल सकता है, लेकिन वहां से गिरने पर निफ्टी 8300 के आसपास जाकर ही ठहर सकता है। अब करते हैं शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी