कांच बनने से क्या फायदा? जो जैसा आता है, वैसा ही निकल जाता है। बनो तो कम से कम आईना बनो, जिसमें दूसरे अपनी शक्ल देख सकें। सबसे अच्छा तो यह है कि प्रिज्म बनो जिससे निकलकर प्रकाश के सातों रंग अलग-अलग हो जाते हैं।और भीऔर भी

सत्ता मिलते ही मरतक नेताओं तक के चेहरे चमकने लगते हैं, स्वास्थ्य दमकने लगता है, आयु बढ़ जाती है। सत्ता का यही प्रताप है। जनता को भी सत्ता दे दी जाए तो उसका भी सारा दुख-दारिद्र मिट सकता है।और भीऔर भी

हम लाख जतन कर लें, भरपूर तैयारी कर लें, फिर भी अनिश्चितता व अनहोनी की गुंजाइश बनी रहती है। यह कमजोरी नहीं, हमारी सीमा है। इसलिए अनहोनी से निपटने के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए।और भीऔर भी

दूर से ढोल के बोल ही नहीं, लोग भी बड़े सुहाने लगते हैं। पास आने पर पता चलता है कि सुहानी सूरत के पीछे कितना विद्रूप छिपा है। इसीलिए कहते हैं कि इंसान की सूरत नहीं, सीरत पर जाना चाहिए।और भीऔर भी

स्त्री होने के नाते ही पत्नी का भाव-संसार पति से भिन्न हो जाता है। हमें इस भिन्नता को अंगीकार करना पड़ेगा। उसका चेहरा हमारे चेहरे में समा नहीं सकता, साथ जुड़कर नया चेहरा बनाता है।और भीऔर भी