निवेशकों को उन्हीं कंपनियों में अपनी बचत लगानी चाहिए जिन्हें वे जानते हों। खासकर तब, जब हवा का रुख उल्टा हो, दिग्गज कंपनियों तक के शेयर पिट रहे हों, तब उन्हें ऐसी कंपनियों को चुनना चाहिए जो मजबूत धरातल पर खड़ी हों। आर्थिक दुविधा और गिरावट के दौर में अपना होमवर्क भी बेहद जरूरी है। यह न केवल अपनी संपदा को बढ़ाने, बल्कि उसे बचाने के लिए भी आवश्यक है। पेश है ऐसी ही एक लार्जकैप कंपनी…औरऔर भी

विचार और विश्वास धीरे-धीरे हमारी आदत का हिस्सा बन जाते हैं। फिर इन्हीं के चश्मे से हम सच को देखने लगते हैं और वो टेढ़ामेढ़ा हो जाता है। विकृत सच हमें गलत एक्शन को उकसाता है। हम हारने और खीझने लगते हैं। लेकिन आदत की ताकत हासिल कर चुके विचारों को बदला जा सकता है। इसका अचूक तरीका है अभ्यास। गीता में श्रीकृष्ण कहते हैं अभ्यासेन कौन्तेय। अभ्यास को आगे बढ़ाते हुए डालते हैं आज पर नज़र…औरऔर भी

विश्वविजयी होना, सब पर राज करना बड़ी सहज मानवीय इच्छा है। बाज़ार को भी हम मुठ्ठी में कर लेना चाहते हैं। चाहते हैं कि वो हमारे विचार से चले। धीरे-धीरे ऐसे सूत्र का भ्रम पाल लेते हैं जिसकी बदौलत हम न्यूनतम भाव पर खरीदकर उच्चतम पर बेच सकते हैं। तमाम ट्रेडर/निवेशक ऐसा सोचकर दांव पर दांव लगाते जाते हैं। ऐसे लोग ज़िदगी में बहुत सारी नाकामियां झेलने के लिए अभिशप्त हैं। कैसे बचें इससे, आइए देखते हैं…औरऔर भी

जिस तरह कुशल पहलवान विरोधी के वजन को ही उसे धूल चटाने के लिए इस्तेमाल करता है, उसी तरह बाज़ार ट्रेडर की हर छिपी कमज़ोरी का इस्तेमाल उसे पटखनी देने के लिए करता है। लालची ट्रेडर अपनी औकात से कहीं ज्यादा बड़ी खरीद से पिटते हैं। डरपोक ट्रेडर जीतती बाज़ी तक छोड़कर भाग निकलते हैं। वहीं, आलसी ट्रेडर बाज़ार के पसंदीदा शिकार हैं। वो उन्हें अपनी तेज़ी से मारता है। अब करें ट्रेडिंग की साधना का अभ्यास…औरऔर भी

पैसा बड़े-बड़ों को हिलाकर रख देता है। 50% डिस्काउंट मिले तो हम दोगुनी खरीदारी कर डालते हैं। साथ में कुछ मुफ्त ऑफर हो तो महंगी चीज़ तक खरीद डालते हैं। पैसा हमें भावनाओं की ऐसी भंवर में उलझा देता है जहां हम तर्कसंगत फैसले नहीं कर पाते, जबकि ट्रेडिंग तर्कसंगत व्यवहार की मांग करती है। पैसे पर फोकस रहेगा तो ट्रेडिंग में फिसल जाएंगे। कुशल ट्रेडिंग पर ध्यान रहेगा तो पैसा अपने-आप आएगा। अब आज की ट्रेडिंग…औरऔर भी

भाव बढ़ते और गिरते हैं। लंबे निवेश के लिए इसका खास मतलब नहीं। मायने-मतलब है तो मूल्य का। भाव के लिए चुकाए गए धन के एवज में हमें मिलता है मूल्य। भाव हमें दिखता है। मूल्य दिखता नहीं, लेकिन हमारे निवेश की सार्थकता का सार है। भाव शरीर है तो मूल्य चरित्र है, आत्मा है। हम ऐसे ही मूल्यवान शेयरों को बराबर यहां पेश करते रहे हैं। मसलन, अतुल लिमिटेड तीन साल में तीन गुना हो गया…औरऔर भी

ट्रेडिंग से कमाई के लिए हमेशा सही होना ज़रूरी नहीं। सच तो यह है कि बाज़ार आपको ज्यादातर हराएगा। इसमें कोई हेठी नहीं, बल्कि सीख मिलती है कि अतिविश्वास कितना घातक हो सकता है। असली सूत्र है कि जब कभी बाज़ार आपको गलत साबित करे, आप पतली गली से निकल लें। इसका सबसे कारगर ज़रिया है स्टॉप लॉस। जो चक्रव्यूह में घुसकर निकलना नहीं जानते, उनका हश्र अभिमन्यु जैसा ही होता है। देखें अब आज का हाल…औरऔर भी

यूं तो ज्यादातर ट्रेडर हाई ब्लड-प्रेशर के शिकार होते है। लेकिन उत्तेजना में जीनेवाले ट्रेडर ज्यादा टिकते नहीं। लाभ-हानि दोनों ही अवस्था में जो शांत रहते हैं, वही टिकते हैं। सौदे में बड़ी कमाई से चहकनेवाले ट्रेडर उस वकील जैसे हैं जो मुकदमे के बीच ही नोट गिनने लगता है। वहीं घाटा खाकर लस्त पड़नेवाले ट्रेडर उस सर्जन जैसे हैं जो ऑपरेशन टेबल पर मरीज का खून देखकर बेहोश हो जाता है। अब बाज़ार पर शांत नज़र…औरऔर भी

शेयर का भाव ठीक उस वक्त खरीदारों और विक्रेताओं के बीच स्वीकृत मूल्य को दर्शाता है। तेजड़िया इस उम्मीद में खरीदता है कि भाव आगे बढ़ेगा। मंदड़िया इस भरोसे में बेचता है कि भाव गिरेगा। ये चारों तरफ से ऐसे निवेशकों/ट्रेडरों से घिरे रहते हैं जो दुविधाग्रस्त हैं। दुविधा छोड़ ऐसे लोग बाज़ी न मार ले जाएं, यह डर तेजड़ियों और मंदड़ियों से सौदा करवाता है और निकलता है भाव। उतरें अब भावों की ताज़ा भंवर में…औरऔर भी