क्यूपिड का मतलब है प्रेम का देवता, कामदेव। इसी के नाम पर 1985 में बनी क्यूपिड ट्रेड्स एंड फाइनेंस। मुंबई के पंचरत्न ओपरा हाउस में दफ्तर है। केतनभाई सोराठिया इसके कर्ताधर्ता हैं। कल सुबह एसएमएस आया कि क्यूपिड ट्रेड्स को 145 पर खरीदें, महीने भर में 460 तक जाएगा। अरे भाई, कैसे? सालों से कंपनी का धंधा तो निल बटे सन्नाटा है! सावधान रहें ऐसे प्रेम-पत्रों से। झांसे में कतई न आएं। अब देखें गुरुवार का बाज़ार…औरऔर भी

दुनिया पहले से सोचे ढर्रे पर चलती रहे तो जीवन का सारा थ्रिल खत्म हो जाए। अनिश्चितता के पहलू को कभी नज़रअंदाज़ करके नहीं चला जा सकता। कल भी यही हुआ। सब माने बैठे थे कि रूस यूक्रेन पर हमला करने ही वाला है। लेकिन ऐनवक्त पर पुतिन ने रूसी सेनाओं को वापस बुलाने का आदेश दे दिया। भारत समेत दुनिया भर के बाज़ार इस अप्रत्याशित कदम से चहचहाने लगे। अब देखें बुधवार की दस्तक क्या है…औरऔर भी

दुनिया तो गोल थी ही। बाज़ार भी अब ग्लोबल हो चला है। पुतिन द्वारा युद्ध की घोषणा से यूक्रेन में लामबंदी। चीन में मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर का उत्पादन घटकर आठ माह के न्यूनतम स्तर पर। ऐसे तमाम घटनाक्रम भारतीय शेयर बाज़ार के लिए उतनी ही अहमियत रखते हैं जितनी दिसंबर तिमाही में आर्थिक विकास दर का घटकर 4.7% पर आ जाना। कोई कितनी खबरों के पीछे भागे! इसलिए भाव देखो, भावों का चार्ट देखो। अब वार मंगल का…औरऔर भी

बड़े निवेशकों की चाल क्या, कब और कैसे होती है, इसका एक नमूना पेश किया शुक्रवार को राकेश झुनझुनवाला ने। उन्होंने एचटी मीडिया के 15 लाख शेयर 71.25 रुपए के भाव पर खरीद लिए। 10.69 करोड़ रुपए का यह सौदा बल्क डील के माध्यम से हुआ। जाहिर है कि इतनी बड़ी एकमुश्त रकम हमारे-आपके पास नहीं हो सकती। लेकिन भाव का यह वो स्तर था, जहां पहले संस्थागत खरीद हो चुकी थी। अब नए महीने का आगाज़…औरऔर भी

हमारे या आप जैसे लोगों की औकात नहीं कि बाज़ार तो छोड़िए किसी अदने से स्टॉक की चाल बदल सकें। हमारी मांग से बाज़ार का बाल भी बांका नहीं होता। इसलिए जब हम मांग-सप्लाई की बात करते हैं तो उसका सीधा-सा मतलब होता है बैंक, बीमा, म्यूचुअल फंडों, एफआईआई और बड़े ब्रोकरेज़ हाउसों की मांग जो हर दिन लाखों नहीं, करोड़ो में खेलते हैं। उनकी चाल को पहले से भांपना असली चुनौती है। अब अभ्यास शुक्रवार का…औरऔर भी

शेयरो की ट्रेडिंग में कामयाबी के लिए तीन चीजों की जानकारी बेहद जरूरी है। पहली यह कि बाज़ार में कौन-कौन से खिलाड़ी सक्रिय हैं और उनकी हैसियत क्या है। दूसरी यह कि भावों की चाल क्या कहती है। हमें भावों की दशा-दिशा को चार्ट पर पढने की भाषा आनी चाहिए। तीसरी और अंतिम जानकारी यह कि ठीक इस वक्त किसी स्टॉक में मांग-सप्लाई का संतुलन क्या है। इन तीनों पर महारत आवश्यक है। अब आज का व्यवहार…औरऔर भी

जो लोग ट्रेडिंग से कमाई के लिए किसी जादुई मंत्र/सूत्र की तलाश में लगे हैं, वे भयंकर गफलत के शिकार है। रेगिस्तान में मरीचिका के पीछे भागते प्यासे हिरण जैसी उनकी हालत है। सारी दुनिया का अनुभव बताता है कि ऐसा कोई जादुई मंत्र नहीं है। बड़े-बड़े कामयाब ट्रेडर यह बात कह चुके हैं। यहां संभावना या प्रायिकता काम करती है। रिस्क/रिवॉर्ड का अनुपात देखकर लोग स्टॉप लॉस व लक्ष्य तय करते हैं। अब मंगल का बाज़ार…औरऔर भी

मछली जल की रानी है, जीवन उसका पानी है। हाथ लगाओ, डर जाएगी। बाहर निकालो, मर जाएगी। बचपन में सुनी-बोली गई ये पंक्तियां आपको याद होंगी। ट्रेडिंग में कमाई हमारे हाथ से ऐसे ही छटकती रहती है। दुनिया भर में बहुतेरे लोगबाग तो इससे कमा ही रहे हैं! फिर आखिर हम ही क्यों चूक रहे हैं? कहां हो रही है हमसे भूल-गलती? कौन-से गुर हमारे पास नहीं हैं? सोचिएगा तो मिल जाएगा जबाव। अब हफ्ते का आगाज़…औरऔर भी

बात बड़ी सीधी है। मांग सप्लाई से ज्यादा तो भाव बढ़ते हैं और सप्लाई मांग से ज्यादा तो भाव गिरते हैं। सामान्य बाज़ार का यह सामान्य नियम शेयर बाज़ार पर भी लागू होता है। कुशल ट्रेडर का काम है ठीक उस बिंदु को पकड़ना, जब मांग-सप्लाई में सर्वाधिक असंतुलन हो। इसी बिंदु से शेयरो के भाव पलटी खाते हैं और यही मौका होता है न्यूनतम रिस्क में अधिकतम कमाई करने का। यही सूत्र पकड़कर बढ़ते हैं आगे…औरऔर भी

रिटेल निवेशक और ट्रेडर अगर आज बाज़ार से गायब हो चुके हैं तो इसकी वजह बड़ी साफ है। एक अध्ययन के मुताबिक 2008 से 2013 तक के पांच सालों में गलत प्रबंधन के चलते रिलायंस इडस्ट्रीज़ ने शेयरधारको की दौलत में दो लाख करोड़, एनटीपीसी व एयरटेल ने अलग-अलग 1.2 लाख करोड़, डीएलएफ ने 1.1 लाख करोड़ और आरकॉम ने एक लाख करोड़ रुपए का फटका लगाया है। इस सच के बीच पकड़ते हैं गुरु की चाल…औरऔर भी