एग्जिट पोल के नतीजे शाम 6.30 बजे से आना शुरू हुए। लेकिन बाज़ार को इससे तीन घंटे पहले ही इन नतीजों का आभास मिल गया था और सेंसेक्स व निफ्टी दोनों ही नए ऐतिहासिक शिखर पर पहुंच गए। यह शुद्ध सट्टेबाज़ी का असर है या एग्जिट पोल के नतीजे न्यूज़ चैनलों ने पहले ही बाज़ार को लीक कर दिए, पूंजी बाज़ार नियामक संस्था, सेबी इसकी जांच कर रही है। इस भयंकर सट्टेबाज़ी के मद्देनज़र देखते हैं बाज़ार…औरऔर भी

ट्रेडिंग हम इसलिए करना चाहते हैं ताकि पैसा बना सकें। पैसा इसलिए बनाना चाहते हैं ताकि दुनिया में अपने व अपने परिवार के लिए सुख, समृद्धि और सुरक्षा के साधन जुटा सकें। आम व्यापार में लोगों तक उनके काम की चीजें पहुंचाकर हम मूल्य-सृजन करते हैं। लेकिन क्या शेयरों की ट्रेडिंग से ऐसा मूल्य-सृजन होता है? इसमें तो पैसा एक की जेब से निकलकर दूसरे के पास ही पहुंचता है! गंभीरता से सोचिए। नए हफ्ते का आगाज़…औरऔर भी

स्मॉल कैप स्टॉक्स में निवेश इसीलिए करते हैं कि उनमें कई गुना बढ़ने की संभावना होती है। लेकिन जब सभी स्मॉल कैप कंपनियों की तरफ टूट पड़े हों तो उनके भाव ज्यादा ही चढ़ जाते हैं। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि बीएसई सेंसेक्स फिलहाल 17.88 के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा है, जबकि उसका स्मॉल कैप सूचकांक 116.05 के पी/ई पर। आखिर, इतनी महंगी चीज़ के पीछे क्यों भागें! तो, आज तथास्तु में एक लार्जकैप स्टॉक…औरऔर भी

बाज़ार भले ही 25 अप्रैल से बिकवाली का शिकार हो। लेकिन निफ्टी जिस तरह 4 फरवरी से 23 अप्रैल के बीच 14% बढ़ा, उसका श्रेय ‘अबकी बार, मोदी सरकार’ को दिया जा रहा है। यह कौआ कान ले गया, सुनकर कौए के पीछे दौड़ पड़नेवाली बात है क्योंकि इसी दरमियान तुर्की का बाज़ार 20%, ब्राज़ील का 16%, इंडोनेशिया का 19% और मलयेशिया का 18% बढ़ा है। इसलिए अंश ही नहीं, समग्र को देखिए। अब शुक्रवार का बौद्ध-ट्रेड…औरऔर भी

बाज़ार सबके लिए एक है। स्टॉक्स की लिस्ट और उनसे बने सूचकांक सबके लिए एक हैं। लेकिन हर दिन वहां से कुछ लोग रोते हुए निकलते हैं तो कुछ खिलखिलाते हुए। जाहिर है कि हर ट्रेडर की गति उसकी व्यक्तिगत स्थिति पर निर्भर है, न कि बाज़ार की वस्तुगत स्थिति पर क्योंकि उठना-गिरना तो बाज़ार का शाश्वत स्वभाव है। इसलिए कुछ जानकार लोग कहते हैं कि ट्रेडिंग खुद को खोजने जैसा काम है। अब खोज गुरुवार की…औरऔर भी

आप चाहें तो सर्वे करके देख सकते हैं कि जो लोग ट्रेडिंग में टिप्स के पीछे भागते हैं, वे मरीचिका के चक्कर में भागते हिरण की तरह ताज़िंदगी प्यासे रह जाते हैं। लंबे निवेश में यकीनन रिसर्च आधारित सलाह काम करती है। लेकिन ट्रेडिंग में घुसने, निकलने, घाटा खाने और पूंजी बचाने व बढ़ाने का सिस्टम बनाकर अनुशासन का पालन न किया, लालच व डर को हावी होने दिया तो कमाई मुमकिन नहीं। अब बुधवार की ट्रेडिंग…औरऔर भी

शेयर बाज़ार में आग-सी लगी है। सेंसेक्स और निफ्टी थोड़ा दम मारने के बाद नया ऐतिहासिक शिखर बना डालते हैं। विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) इस साल 1 जनवरी से कल 5 मई तक भारतीय शेयर बाज़ार के कैश सेगमेंट में 35,559 करोड़ रुपए (करीब 590 करोड़ डॉलर) की शुद्ध खरीद कर चुके हैं। ऐसा तब है जब जनवरी से ही अमेरिका के फेडरल रिजर्व ने बांडों की खरीद घटा दी है। ऐसे में है सावधानी की दरकार…औरऔर भी

तूफान में दो तरह के लोग बाहर निकलते हैं। एक, राहतकर्मी और दूसरे ऐसे दुस्साहसी लोग जो तूफान से भी मौजमस्ती खींच लाने में पारंगत होते हैं। अगले सोमवार, 12 मई को लोकसभा चुनावों का अंतिम चरण पूरा हो जाएगा। उसी हफ्ते शुक्रवार, 16 मई को नई सरकार का फैसला होगा। ऐसे में बेहद दुस्साहसी या उस्ताद ट्रेडर ही शुक्रवार 9 मई के बाद अपनी पोजिशन खुली रखेंगे। निकालने के लिए कैश, आगाज़ करें नए हफ्ते का…औरऔर भी

महंगाई साल-दर-साल बढ़ती है। देशी घी तीन साल पहले 250 रुपए/किलो था, अभी 400 रुपए/किलो हो चुका है। फिर कंपनी के शेयरों में महंगाई क्यों नहीं आती? आती है, बल्कि सच कहें तो अच्छी कंपनियां ही महंगाई को मात दे पाती हैं। इसीलिए महंगाई को बेअसर करने के लिए उनमें धन लगाया जाता है। तीन साल पहले यहां सुझाया सुप्रीम इंडस्ट्रीज़ का शेयर 155 से 460 हो चुका है। आज तथास्तु में एक मिडकैप कंपनी…और भीऔर भी

शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग खुद गाड़ी ड्राइव करने जैसा है, जबकि लंबा निवेश ट्रेन से लंबी दूरी के सफर जैसा है। ड्राइविंग के तौर-तरीके आप सीख सकते हैं। लेकिन ट्रैफिक के बीच अगल-बगल की गाड़ियों से दूरी का सेंस, कहां से कट मारकर कहां निकलना है, यह हरेक के अपने अंदाज़, फितरत और अभ्यास पर निर्भर करता है। वहीं, ट्रेन में टिकट लिया और निश्चिंत होकर सो गए। मंज़िल आने पर उतर लिए। अब शुक्र की ट्रेडिंग…औरऔर भी