जीवन का सारा ज्ञान-विज्ञान जो हो चुका है, उसकी तह में पैठने से निकलता है। इसके आधार पर आगे जो हो सकता है, उसका अनुमान लगाया जाता है। यह अनुमान सही हो सकता है और गलत भी। गलत हुआ तो नए मिले तथ्यों के आधार पर नई परिकल्पना या हाइपोथिसिस की जाती है और परीक्षणों पर उसे कसकर नया ज्ञान-विज्ञान निकाला जाता है। ट्रेडिंग को भी साधने की यही प्रक्रिया है। अब आजमाते हैं बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

वित्तीय बाज़ार इस मामले में आम बाज़ारों से अलग है कि यहां भाव गिरने पर खरीदार भी बिकवाल बन जाते हैं और बाज़ार गिरता जाता है। वहीं, आम बाज़ार में माल का दाम गिरने पर खरीदनेवाले बढ़ जाते हैं। दरअसल वित्तीय बाज़ार में भाव आशा या निराशा के चलते बढ़ते-घटते हैं। यहां अलग किस्म की भावना काम करती है। सफल ट्रेडर भाव को भावना से मुक्त करके देखता है। कोशिश करें अब मंगलवार की नब्ज पकड़ने की…औरऔर भी

वित्तीय बाज़ार में देश-विदेशी संस्थाओं के अलावा एनआरआई, एचएनआई और ब्रोकर हाउस भी ट्रेड करते हैं। इनकी खरीद-बिक्री से ही बाज़ार की दशा-दिशा तय होती है। लेकिन वे क्या कर रहे हैं, यह हम पहले से पता लगाने के चक्कर में पड़े तो पक्का धोखा खाएंगे। वे जो कुछ करते हैं, वह रोज़ाना भावों के चार्ट में खुलकर सामने आ जाता है। हमारा काम इन भावों से भावी दिशा को भांपना भर है। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

तमाम निवेश सलाहकार और म्यूचुअल फंड के लोग कहते हैं कि हमें इक्विटी या शेयरों में लॉन्ग टर्म के लिए निवेश करना चाहिए। लेकिन यह नहीं बताते कि लॉन्ग टर्म मतलब कितना? साल-दो साल या पांच-दस साल! हमारा मानना है कि हर कंपनी के बढ़ने का एक चक्र होता है। उसी चक्र के हिसाब से हमें निवेश की मीयाद तय करनी चाहिए। मसलन, आज तथास्तु में बताई गई कंपनी का उठाव चक्र दो-तीन साल का ही है…औरऔर भी

सुबह-सुबह रिजर्व बैंक ने अचानक जब ब्याज दर 0.25% घटाकर 7.5% कर दी तो बाज़ार उछल पड़ा। सेंसेक्स 30,000 और निफ्टी 9100 के पार चला गया। लेकिन तभी मुनाफावसूली का ऐसा सिलसिला चला कि सेंसेक्स 0.72% और निफ्टी 0.82% गिरकर बंद हुआ। इससे एक ही बात साफ होती है कि खबरों और भावों में रिश्ता तो है, मगर सीधा नहीं। भाव खरीद और बिक्री के संतुलन से ही तय होते हैं। अब पकड़ते हैं गुरु की दृष्टि…औरऔर भी

शेयर बाज़ार में सफल ट्रेडिंग के लिए बाज़ार बंद होने के बाद डेढ़-दो घंटे और सुबह बाज़ार खुलने से पहले डेढ़-दो घंटे रिसर्च करना ज़रूरी है। हम ऐसी रिसर्च में खुद भी लगभग इतना-ही समय लगातार आपका काम थोड़ा आसान कर देते हैं। लेकिन ऐसा संभव नहीं कि आप कोई मेहनत न करें, बस यह कॉलम पढ़कर ट्रेडिंग से कमाई कर लें। ट्रेडिंग का अपना सिस्टम व अनुशासन आपको ही बनाना पड़ेगा। अब लगाएं बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

अगर आप किसी चीज़ को सरल रखें, तामझाम व झांकी न जोड़ें तो लोग उसे नहीं खरीदते। बेचने के लिए पैकेजिंग बड़ी जानदार होनी चाहिए। लेकिन धन बनाने का फंडा बड़ा सीधा होना चाहिए। ट्रेडिंग में यह बात पूरी तरह लागू होती है। जो लोग टेक्निकल एनालिसिस के तमाम इंडीकेटरों से लेकर फंडामेंटल व फिबोनाच्ची नंबरों का सहारा लेते हैं, वे प्रायः घाटा खाते हैं। वहीं सरलता आपको सफलता तक ले जाती है। अब मंगल की नब्ज़…औरऔर भी

बजट अच्छा है या बुरा, इस पर माथापच्ची करना विश्लेषकों व कंपनियों के रणनीतिकारों का काम है। ट्रेडर का काम तो जो और जैसा है, उसमें कमाने की जुगत निकालने का है, बजट की लहर पर सवारी गांठने का है। बजट से बाज़ार उठता है तो बढ़नेवाले शेयरों के साथ कमाना है। सीमित दायरे में रहे तो रिट्रेसमेंट या इम्पल्स से कमाएंगे। नीचे गिरे तो स्टॉक्स के सपोर्ट स्तर से कमाएंगे। अब बजट-बाद की ट्रेडिंग का आगाज़…औरऔर भी

शेयरों के भाव कभी न कभी अपने अंतर्निहित मूल्य तक पहुंचते ही हैं। चढ़ा हुआ स्टॉक नीचे उतरता है और गिरा हुआ स्टॉक ऊपर भी उठता है। फिर, निवेश करते वक्त सुरक्षित मार्जिन भी लेकर चलना होता है। अगर किसी स्टॉक में ऐसा मार्जिन न दिखे तो फिलहाल उसमें निवेश नहीं करना चाहिए और हमें उसके गिरने की बाट जोहनी चाहिए। नहीं गिरे तो उसका मोह छोड़ देना ही श्रेयस्कर है। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

ट्रेडिंग का आसान सूत्र है कि आप सामनेवाले से थोड़ा-सा भी बेहतर हुए तो जीतेंगे। बेहतरी तीन चीजों से बनती हैं – सूचनाएं, विश्लेषण व भावनात्मक बर्ताव। पहली दो चीजें आपको बाहर से मिल सकती हैं, जबकि तीसरी व निर्णायक चीज़ के मालिक आप हैं। आप कहेंगे कि भावना तो हर इंसान में होती है, उससे कैसे बचा जा सकता है! सही बात है। इसीलिए पोजिशन साइज़िंग व स्टॉप-लॉस का अनुशासन है। अब छलांग बजट के बवंडरऔरऔर भी