समाज बुद्धिजीवियों की कितनी भी इज्जत करे। लेकिन समाज व बाज़ार सिद्धांतों या बड़ी-बड़ी बातों से नहीं, बल्कि व्यवहार से चलता है। कुछ समय के लिए बातें अपना असर दिखा सकती है। लेकिन जैसे ही बातों की हकीकत सामने आती है, बाज़ार उसे ही अपना आधार बना लेता है। ब्रिटेन के यूरोपीय संघ से निकलने की बड़ी घटना की असलियत ने बाजार के इस शाश्वत सच को उजागर कर दिया है। अब देखते हैं सोमवार का व्योम…औरऔर भी

हम जो कर रहे हैं, उसको जिस हद तक नहीं जानते, उतना ही उसमें रिस्क होता है। शेयर बाजार में निवेश करते समय यह बात दिमाग में भलीभांति बैठा लेनी चाहिए। हम अक्सर किसी के महज कहने पर अपनी बचत लगा देते हैं, बिना कायदे से जाने कि जिस कंपनी में हम निवेश कर रहे हैं वो करती क्या है। सोचिए कि अगर आप उदयमी होते तो क्या वह कंपनी बनाते? तथास्तु में एक और संभावनामय कंपनी…औरऔर भी

आम ट्रेडर को हर हाल में खबरों के वक्त ट्रेडिंग से बचना चाहिए। लेकिन अगर आप खास हैं और राजनीति से लेकर अर्थनीति तक में इतनी गहरी पैठ रखते है कि बाज़ार की भीड़चाल से अलग हटकर अनुमान लगा सकते हैं तो इनसे जुड़ी खबरों के वक्त ट्रेडिंग से अच्छी कमाई कर सकते हैं। शर्त इतनी है कि राजनीतिक या आर्थिक घटनाक्रम आगे क्या मोड़ लेगा, इसका पूरा भान आपको होना चाहिए। अब करें, शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

आम ट्रेडर के पास क्या होता है! अतीत के आंकड़े और टेक्निकल एनालिसिस का ज्ञान। पुराने भावों और पैटर्न के दम पर वो भावी चाल का अंदाज़ा लगाता है। इतिहास खुद को दोहराता है तो यह अंदाज़ा सही पड़ जाता है और वो कमा लेता है। अन्यथा, रिस्क प्रबंधन के सूत्र अपनाकर घाटे को न्यूनतम रखते हुए पूंजी को बचाकर चलता है। लेकिन खबरों के दौरान भविष्य का अंदाज़ लगाना संभव नहीं होता। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

हम हमेशा ट्रेड करना चाहते हैं क्योंकि कोई मौका चूकना नहीं चाहते। लेकिन नहीं समझ पाते कि कुछ मौकों को छोड़ देना लंबी पारी खेलने के लिए बेहद ज़रूरी होता है। हर कोई बाउंसर नहीं खेल पाता। हमें अपनी सीमा और कमज़ोरी का भान हमेशा होना चाहिए। संस्थाएं और बड़े ऑपरेटर दो बजे के आसपास करोड़ों का मार्केट ऑर्डर देकर अगले दिन का रुख तय कर देते हैं। हम नहीं कर सकते। अब चलाएं, बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

अगर हम तभी ट्रेड करते हैं जब हालात अपने माफिक हों तो अपनी सफलता की अधिकतम प्रायिकता को सुनिश्चित करते हैं। जब हमें पता हो कि हमारी रणनीति काम नहीं करने जा रही है, तब ट्रेडिंग से दूर रहकर हम अनावश्यक रिस्क से खुद को बचाते हैं। शेर से लड़ गए और शेर खा गया, जैसी बहादुरी का कोई फायदा नहीं होता। न्यूनतम रिस्क में अधिकतम फायदा। यही है सही सोच। अब पकड़ते हैं मंगल की दृष्टि…औरऔर भी

शेखचिल्ली लोग न तो समाज में सफल होते हैं, न राजनीति या कूटनीति में सफल होते हैं और न ही वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग में। गांठ बांध लें कि अगर जीतना है, कमाई करनी है तो शेयर बाज़ार में तभी ट्रेडिंग करें, जब हालात अपने पक्ष में हों। जाहिर है, आगे क्या होगा, यह हमारे वश में नहीं। लेकिन जब हर तरफ भयंकर अनिश्चितता छाई हो, तब कतई ट्रेड न करें। अब समझते हैं सोम का व्योम…औरऔर भी

इस साल 29 फरवरी को निफ्टी 6826 पर था। बढ़कर 7 जून को 8295 तक जा पहुंचा। 1469 अंक ऊपर। बीते हफ्ते दो बड़ी घटनाओं में यह इसका आधा, 735 अंक गिरकर 7560 पर आ गया होता तो अच्छी बात होती। लेकिन राजन के मामले पर वो गिरा ही नहीं; ब्रिटेन के यूरोपीय संघ से निकलने पर 181.85 अंक ही गिरा। और गिरता तो अच्छे शेयर सस्ते हो गए होते! अब तथास्तु में आज की संभावनामय कंपनी…औरऔर भी

खबरों पर शेयर बाज़ार में उथल-पुथल मचती है और ज्यादा बड़ी खबरों पर ज्यादा ही बवाल मचता है। मसलन, 17 मई 2004 को वाजपेयी सरकार की हार पर बाज़ार एक दिन में 11.1% टूट गया था, जबकि 17 मई 2009 को यूपीए सरकार की जीत पर 17.3% चढ़ गया था। इस हफ्ते सोमवार को राजन के झटके पर कुछ ऐसा ही अंदेशा था। अचंभा! कुछ हुआ नहीं। झटका ब्रिटेन की संघ-निकासी पर! करते हैं शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

जिस जनमत-संग्रह पर दुनिया भर का ध्यान लगा है, वो आज लंदन के समय से सुबह 7 बजे (भारतीय समय 11.30 बजे) से शुरू होकर रात 10 बजे तक चलेगा। लेकिन कल शुक्रवार को अपना बाज़ार खुलने के लगभग ढाई घंटे बाद ही पता चलेगा कि ब्रिटेन की जनता ने यूरोपीय संघ के साथ 43 साल से चला आ रहा रिश्ता निभाने का फैसला किया है या तोड़ने का। कयासबाज़ी का फायदा नहीं। देखें गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी