नोबेल पुरस्कार जीतने वाले से बड़ा विद्वान कौन होगा? उसने भी अगर शेयर बाज़ार पर रिसर्च कर रखी हो तो कहने ही क्या! लेकिन वे भी ऐलानिया कहते हैं कि छोटी अवधि में शेयरों की चाल को पकड़ना मुमकिन नहीं। इसलिए मानकर चलिए कि सारी गणनाओं के बावजूद हम ट्रेडिंग में काफी हद तक कयासबाज़ी का ही सहारा लेते हैं। ऐसे में गलत दांव पड़ने का जोखिम संभालना बेहद ज़रूरी है। अब पकड़ते हैं गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी

यक्ष ने युधिष्ठिर से पूछा कि सबसे बड़ा आश्चर्य कौन-सा है? युधिष्ठिर का जवाब था: हर दिन यहां कोई न कोई मरता है। फिर भी बाकी बचे लोग अनंत समय तक जीने का भ्रम पाले रहते हैं। इसी तरह बार-बार कही गई कहावत है कि बिना अपने मरे स्वर्ग नहीं मिलता। फिर भी लोग शेयर बाजार की ट्रेडिंग में दूसरे की टिप्स पर कमाई का मंसूबा पाले रहते हैं। यह सोच आत्मघाती है। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

वे खुद को भारत में अल्पकालिक निवेश या ट्रेडिंग की संभवतः सबसे विश्वसनीय सेवा बताते हैं। अर्थकाम से साल भर बाद अंग्रेज़ी में स्विंग ट्रेड की यह सेवा शुरू हुई। बड़ी इच्छा थी कि घुसकर देखा जाए, इसमें है क्या! लेकिन साल का एक लाख रुपए कैसे देता? इधर 40,000 रुपए के ऑफर के साथ 5000 रुपए में महीने भर आजमाने का मौका मिला तो अंदर देखा कि ढोल के भीतर पोलमपोल है। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

कबीर का दोहा है: प्रेम न बाड़ी ऊपजै, प्रेम हाट बिकाय; राजा परजा जेहि रूचै, सीस देइ लै जाय। काम का हरेक ज्ञान इसी तरह मिलता है। यही ट्रेडिंग में भी कामयाबी का सूत्र है। अगर खुद का सिस्टम नहीं पकड़ा तो महंगी से महंगी सेवा तक ट्रेडिंग से कमाई नहीं करवा सकती। अनुभवी लोग इसकी तस्दीक करेंगे। मैंने हाल में इसे आपकी तरफ से आजमाकर देखा और नतीजा वही जाना-पहचाना। अब परखते हैं सोमवार का व्योम…औरऔर भी

शेयर बाजार से कमाना अस्थिर मन के लोगों के वश की बात नहीं। इसके लिए साधक जैसा शांत मन चाहिए। जिस तरह पहले साधकों का ध्यान भंग करने के लिए रम्भा व मेनका जैसी अप्सराएं भेजी जाती थीं, उसी तरह इस समय निवेशकों को ध्यान भंग करने के लिए राकेश झुनझुनवाला जैसे नाम उछाले जाते हैं। ऐसे नामों की बेवसाइटों से निवेशकों को छला जाता है। इनके झांसे में ना आएं। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

शेयर बाज़ार में लोग-बाग बढ़ने के साथ-साथ गिरने पर भी कमाते हैं। लेकिन गिरने पर कमाने के लिए बड़ी पूंजी और रिस्क लेने का बड़ा माद्दा चाहिए। ऐसे सौदे डेरिवेटिव (एफ एंड ओ) सेगमेंट में ही हो सकते हैं, जहां न्यूनतम लॉट पांच लाख रुपए का है। मार्जिन में भले इसकी 5-10% रकम लगे, लेकिन एक लॉट में ही आप पांच लाख रुपए डुबाने का रिस्क उठाते हो। क्या इतना माद्दा है आपका? अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

बारिश के मौसम में हर तरफ हरी-हरी घास उग आती है तो लालच में पड़कर कुछ गाय-भैंस दसियों जगह मुंह मारती फिरती हैं। लेकिन यह पशु-व्यवहार शेयर बाज़ार की ट्रेडिंग में लगे इंसानों को शोभा नहीं देता। बहुत हुआ तो आप 20-25 स्टॉक छांट लें जिनमें लंबा, मध्यम व छोटा ट्रेन्ड बढ़ने का चल रहा हो। धैर्य से उन पर नज़र रखें और रिट्रेसमेंट पर खरीदें, चढ़ने पर बेचकर मुनाफा कमा लें। अब पकड़ें गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

उम्मीद से बेहतर नतीजों के बावजूद कोई शेयर गिर जाए तो समझ लेना चाहिए कि जिन्होंने पहले इसे खरीदा था, वे बेचकर मुनाफावसूली कर रहे हैं। गिरने का सिलसिला थम जाए, स्टॉक थोड़ा दम भर ले तो उसे खरीद लेना चाहिए क्योंकि ताज़ा खरीद के बल पर वो कुछ दिन में पहले जितना या उससे ऊपर के भाव तक जा सकता है। नतीजों के दौरान यह तरीका काफी लाभदायक साबित होता है। अब आजमाएं बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

एक बात हमेशा गांठ बांधकर चलनी चाहिए कि बाज़ार में हम से ज्यादा मजबूत हज़ारों खिलाड़ी हैं। कौन क्या सोच पकड़ेगा, हमें नहीं पता। हमने जितने कारक गिने हैं, उसके अलावा बहुत से कारक हो सकते हैं जिन पर हमारा ध्यान न गया हो। इतने अनजान पहलुओं के बीच हमारे अतिविश्वास का कोई फायदा नहीं। इसलिए हर सौदे में गिनकर चलना चाहिए कि दांव उल्टा पड़ जाए तो मार को न्यूनतम कैसे रखेंगे। अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी

बाज़ार का हम कुछ बिगाड़ नहीं सकते। लेकिन कोई स्टॉक हमारे माफिक नहीं चलता तो गुस्से में भरकर उसे खरीद या बेच डालते हैं। मेरे गांव के विश्राम सिंह तहसील जा रहे थे मुकदमा लड़ने। साइकिल की चेन बार-बार उतर जा रही थी तो लेट होता जा रहा था। तहसील के पास पुलिया की चढ़ाई पर फिर चेन उतर गई तो मार-लाठी, मार-लाठी साइकिल को ही धुन डाला। मुकदमे की तारीख छूट गई। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी