बाज़ार में चीजों के दाम चलते, बढ़ते व गिरते क्यों रहते हैं? वे एक जगह चिपककर क्यों नहीं रहते? ऐसा इसलिए क्योंकि बाज़ार में उस चीज़ की मांग व सप्लाई में बराबर असंतुलन बना रहता है। संतुलन तक पहुंचते-पहुंचते फिर नया असंतुलन बन जाता है और भाव चल निकलते हैं। पुराने समय में भाप से चलनेवाले रेल इंजिनों के पहियों पर एक तरफ धातु का वक्र टुकड़ा लगाकर असंतुलन पैदा किया जाता था। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

वैसे तो शेयर बाजार की ट्रेडिंग कच्चे दिलवालों या नौसिखिया लोगों के लिए नहीं है क्योंकि इसमें ऐसे घाघ व मंजे हुए खिलाड़ी घात लगाए बैठे हैं जो बेपरवाह व ‘नए मुल्लों’ को चुटकी में हज़म कर जाते हैं। इसलिए नए लोगों को अक्सर हमारी सलाह यही रहती है कि पहले आप साल-दो साल के निवेश को आजमाकर देखें। फिर भी ट्रेडिंग करनी है तो इसमें इफरात पूंजी का केवल 5% हिस्सा लगाएं। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

कहते हैं कि लंबे समय का निवेश फलदायी होता है। यह भी मानते हैं कि स्मॉल-कैप कंपनियां कई गुना रिटर्न देती हैं। पर, बीएसई स्मॉल-कैप सूचकांक 31 दिसंबर 2007 से 3 मार्च 2017 के बीच 13,348.37 से महज 2.03% बढ़कर 13,620.17 पर पहुंचा है। यानी, इस सूचकांक में दस साल पहले लगाए गए आपके 100 रुपए अभी तक मात्र 102 रुपए हुए होते। इसलिए मिथकों में फंसकर निवेश सफल नहीं होता। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

याद रखें कि आज तक ट्रेडिंग का ऐसा कोई तरीका नहीं निकाला गया है जो 100% कामयाबी की गारंटी दे सके। वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग प्रायिकता का खेल है। इसलिए यहां हमेशा घाटे को न्यूनतम रखने के लिए स्टॉप-लॉस व पोजिशन साइजिंग जैसे तरीके अपनाए जाते हैं। इधर, हमारे सीखते जाने का सिलसिला जारी है। हाल ही में आरएसआई के 20% से नीचे चले जाने और ओपन इंटरेस्ट का नया तरीका सीखा है। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी

हम आपके लिए जो भी स्टॉक चुनते हैं, उसके मूल में रहता है कि किसी स्टॉक में संस्थागत ट्रेडर कहां पर एंट्री और एक्जिट ले सकते हैं। इसके लिए हम मुख्य रूप से कैंडल के आकार, स्थान, मूविंग औसत और आरएसआई जैसे गिने-चुने इंडीकेटरों का इस्तेमाल करते हैं। साथ ही भावों की चाल को चार्ट पर अलग-अलग टाइमफ्रेम में देखते हैं। चार्टिंग का सॉफ्टवेयर हम बीएसई व एनएसई का ही इस्तेमाल करते हैं। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी

पिछले पौने चार साल में बहुतों ने यह सेवा ली, बहुत-से बाद में पीछे हट गए और बहुत-से अब भी मैदान में डटे हैं। जो डटे हैं, वे यकीनन ऐसे लोग हैं जिन्होंने ट्रेडिंग का अपना सिस्टम बनाया होगा। गांठ बांध लें कि अपना सिस्टम बनाए बिना आप सटीक सलाहों से भी बराबर नहीं कमा पाएंगे। हम आपकी रिसर्च का बोझ हल्का करते हैं ताकि आप न्यूनतम रिस्क में अधिकतम रिटर्न कमा सकें। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

मासूम ट्रेडरों की ठगी को कैसे रोका जाए? ‘अर्थकाम’ ने ऐसे एक ठग को नजदीकी से पहचाना। हालांकि उस ठग की दुकान अब भी चालू है। उसमें एक राजनीतिक पार्टी के बड़े नेता तक ने निवेश कर रखा है। खैर, रिसर्च का क्रम शुरू हुआ। बहुत सारी किताबें पढ़ डालीं। कई महंगी-महंगी क्लासें कीं। टेक्निकल एनालिसिस भी सीखी। अहसास हुआ कि बगैर अपना सिस्टम बनाकर ट्रेड करने वाले बाजार में हमेशा पिटते हैं। अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी

शेयर बाजार में ट्रेडिंग का यह कॉलम शुरू हुए करीब चार साल होने जा रहे हैं। इसकी प्रेरणा तब मिली, जब हमने देखा कि हिंदी, मराठी या गुजराती भाषी तमाम लोग टिप्स पर ट्रेडिंग करते हैं। कंपनी को ऑर्डर मिलनेवाले हैं, बड़ा एफआईआई खरीदने जा रहा है, म्यूचुअल फंड की खरीद आनेवाली है या बाज़ार का कोई बड़ा खिलाड़ी हाथ लगानेवाला है। ऐसे सफेद झूठ फैलाकर मासूम ट्रेडरों को ठगा जा रहा था। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

जीवन में हमेशा बहुत कुछ नया होता रहता है। इसी तरह अर्थव्यवस्था में भी बहुत कुछ नया और अच्छा होता रहता है। सरकार कुछ करे या करे, उद्यमी अपनी धुन में कुछ न कुछ नया रचते रहते हैं। समझदार निवेशक को हमेशा ऐसे उभरते उद्यमियों और उनकी कंपनियों पर नज़र रखनी चाहिए ताकि वे अपनी अतिरिक्त बचत को उनके साथ जोड़कर जोखिम से उपलब्धि की यात्रा कर सकें। आज तथास्तु में इसी यात्रा पर निकली एक कंपनी…औरऔर भी

लोगबाग ऑप्शंस के दीवाने हैं, खासकर निफ्टी व बैंक निफ्टी ऑप्शंस के। इक्विटी डेरिवेटिव्स के टॉप-20 कॉन्ट्रैक्ट में आपको यही दो ऑप्शंस छाए मिलेंगे। धन भी ज्यादा नहीं लगता। मसलन, निफ्टी-8950 में कॉल का भाव है 16.75 रुपए और लॉट 75 का तो कुल लगे 1256 + 30 रुपए का ब्रोकरेज। डूबें तो यही 1286 रुपए, और फायदा महीने भर में 50-60%! बस डेल्टा, थीटा, गामा व वेगा सीख लें। फंसान है तगड़ी। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी