शेयर बाज़ार में उन्माद-सा छाया हुआ है। जबरदस्त आशावाद। कोई कहता है, निफ्टी अगले एक-डेढ़ साल में 2000 अंक बढ़ जाएगा और तीन साल में 13,000 तक पहुंच सकता है। इसी तरह साल भर के भीतर सेंसेक्स के 54,000 तक उठने की बात की जा रही है। ऐसे में निवेशकों ही नहीं, बहती धारा के साथ बहनेवाले ट्रेडरों को भी बेहद सावधान रहने की ज़रूरत है। वरना, अचानक डूब गए तो! अब परखते हैं सोमवार का व्योम…औरऔर भी

पिछले कुछ हफ्तों से शेयर बाज़ार में विदेशी संस्थाएं बराबर बेच रही हैं, जबकि हमारे म्यूचुअल फंड बराबर खरीदे जा रहे हैं। कारण, आम निवेशक इनमें धन लगा रहे हैं तो खरीदना उनकी मजबूरी है। यह बराबर होता है कि जब बाज़ार शिखर पर होता है तभी रिटेल निवेशक उस ओर दौड़ते हैं। महंगा निवेश अंततः उन्हें मार लगाता है। मगर इंसानी लालच का किया क्या जाए! खैर, आज पेश है तथास्तु में एक और अच्छी कंपनी…औरऔर भी

जो खबर आनी थी, आ चुकी। अब आप हिसाब लगाते हैं कि उसका बाज़ार पर ज़रूरत से ज्यादा असर हुआ है या ज़रूरत से कम। दोनों ही स्थितियों में आप ट्रेडिंग कर सकते हैं। मसलन, ज्यादा गिरा तो वह पलटकर उठ सकता है। वहीं, कम गिरा तो ज्यादा गिर सकता है। यह एक तरह का अनुमान है जिसका सही-गलत होना बाज़ार के पैटर्न व स्वभाव से आपके परिचित होने पर निर्भर करता है। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

नियत समय पर आनेवाली खबरों पर ट्रेड करने का एक तरीका हुआ, उनके आने से पहले अनुमान लगाकर रिस्क उठाना। दूसरा तरीका है खबर आने के बाद ट्रेड करना। यह तरीका अचानक टपक पड़नेवाली खबरों पर भी लागू होता है। ऐसा करने में होड़ बहुत ज्यादा होती है। इसलिए रिटेल ट्रेडर के पिट जाने का खतरा भी बहुत है। हालांकि बाज़ार बंद होने के बाद आनेवाले नतीजों/समाचारों पर खेलना थोड़ा आसान होता है। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

खबरों पर ट्रेड करना बहुत रिस्की है। वैसे, शेयर बाज़ार स्वभाव से ही रिस्की है और रिस्क व रिवॉर्ड के बीच सीधा समानुपाती रिश्ता है। फिर, खबरों से कैसे खेला जाए? जैसे, आज ढाई बजे रिजर्व बैंक मौद्रिक समीक्षा घोषित करेगा। अगर बाज़ार में आम धारणा है कि वो ब्याज दर घटाएगा। मगर आपको लगता है कि ऐसा नहीं तो आप औपचारिक घोषणा से पहले अपनी सोच के माफिक ट्रेड कर सकते हैं। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

जब खबरों का ज़ोर चलता है तो टेक्निकल एनालिसिस कतई कोई काम नहीं करती। मगर, हमारे अधिकांश ट्रेडर ट्रेडिंग के लिए इसी का ही सहारा लेते हैं। ऐसे में खबरों को अपनी ट्रेडिंग रणनीति में कैसे शामिल किया जाए? खबरें दो तरह की होती है। एक का आना पहले से तय होता है। जैसे, कल रिजर्व बैंक मौद्रिक नीति समीक्षा पेश करेगा या कंपनियों के तिमाही नतीजे। दूसरी, जो अचानक टपक पड़ती हैं। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

यूं तो शेयरों के भाव मुख्यतः कंपनी से जुड़ी खबरों से प्रभावित होते हैं। लेकिन अपने यहां खबर सब तक पहुंचते-पहुंचते इतनी जूठी हो चुकी होती है कि उसमें कोई दम नहीं बचता। ऐसा न भी हो तो उस पर खेलनेवाले इतने ज्यादा ताकतवर हैं कि रिटेल ट्रेडर के पास खेलने को कुछ बचता नहीं। इसीलिए नियम है कि आम ट्रेडर को खबरवाले दिन बाज़ार से दूर रहना चाहिए। लेकिन आखिर कब तक? अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

बाज़ार वही है जहां हर वक्त खरीदने और बेचने के मौके बराबर रहते हैं। वैसे अपना शेयर बाज़ार अभी सातवें आसमान पर है तो खरीदने के मौके बहुत कम हैं। यह अलग बात है कि लोगबाग लालच में पहले से चढ़े हुए को ही खरीदने में लगे हैं। लेकिन समझदारी न बरतें तो आज का निवेश कल का रोना बन जाता है। तथास्तु में आज पेश है इस चढ़े हुए बाज़ार में भी निवेश का अच्छा मौका…औरऔर भी

अचानक बाज़ार के गिर जाने पर सारी सावधानी के बावजूद दिल बैठ जाता है। जब अच्छी-खासी मजबूत कंपनियों के शेयर भी गोता लगाने लगते हैं और सारी पूंजी उड़ने लगती है, तब किसी का भी आहत होना स्वाभाविक है। लेकिन हम बराबर कहते रहे हैं कि अगर बुद्ध नहीं बन सकते तो आपको वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग से दूर रहना चाहिए। आपको अपना भावनात्मक संतुलन किसी भी हाल में नहीं टूटने देना चाहिए। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी

बाज़ार का मूड बड़ा अस्थिर है। ऐसे में मान लीजिए, आपने 5-10 दिन की ट्रेडिंग के लिए कोई शेयर खरीदा है तो उसमें स्टॉप-लॉस उठाते जाने के साथ आपको उसका ट्रिगर भी लगाना चाहिए। जैसे, ‘एबीसी’ कंपनी का शेयर आपने 120 पर 132 के लक्ष्य के साथ खरीदा। पहला स्टॉप-लॉस 118 का। बढ़कर 128 तक पहुंचा तो आपने स्टॉप-लॉस 125 का कर दिया। लेकिन साथ ही स्टॉप-लॉस ट्रिगर 125.45 का रख देना चाहिए। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी