आखिर भाव कहां रुख बदलते और कहां जाकर पलट सकते हैं? भाव वहां से चढ़ते हैं जहां खरीदने की चाह और मांग ज्यादा होती है, जबकि लोग बेचने को उत्सुक नहीं होते। वहीं, भाव वहां से गिरते हैं जहां ज्यादातर लोग बेचने को तैयार होते हैं, जबकि खरीदनेवाले बेहद कम होते हैं। मूर्ख या रिटेल ट्रेडर गिरे भावों पर बेचते और चढ़े भावों पर खरीदते हैं। समझदार या संस्थाएं इसका उल्टा करती हैं। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

हमें खुद से बड़ा सीधा-सरल पूछना चाहिए कि शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग/निवेश से कैसे फायदा कमाया जाता है। इसका आसान जवाब है कम भाव पर खरीदना और ज्यादा भाव पर बेचना। मगर सवाल उठता है कि हम सस्ते में खरीद कर महंगे भाव पर कैसे बेच सकते हैं? जवाब है ठीक उस मोड़ पर खरीद या बेचकर जहां से शेयरों के भाव रुख बदलते हैं। यहां से उठता है अगला सबसे अहम सवाल। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

प्रायिकता के खेल को समझना इसलिए ज़रूरी है ताकि हम शेयर बाज़ार के रिस्क को ठीक से संभाल सकें। वहीं, चार्ट को समझने का तरीका एकदम सीधा व सरल होना चाहिए। जो लोग ऑसिलेटर, बहुत सारे पैटर्न और दसियों इंडीकेटरों के चक्कर में पड़ते हैं, वे चिल्लाते ज्यादा और कमाते कम हैं। चंद मूविंग औसत, कैंडल की कुछ आकृतियां और आएसआई काफी होते हैं बाजार में अच्छे सौदे पकड़ने के लिए। अब गहते हैं मंगल की दृष्टि…औरऔर भी

शेयर बाज़ार की ट्रेडिंग में कामयाबी के लिए किसी चमत्कारी मंत्र की तलाश वास्तव में मृग मरीचिका जैसा छलावा है। ऐसा कोई मंत्र है ही नहीं तो कोई कैसे आपको दे सकता है। जो भी ऐसा दावा करता है, वो दरअसल आपकी लालच का फायदा उठाकर किसी न किसी रूप में अपनी जेब भरता है। स्टॉक एक्सचेंजों पर घोषित सूचनाएं और भावों के चार्ट मूलाधार हैं। उन्हें और प्रायिकता के खेल को समझें। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

शेयर बाज़ार का प्रतिनिधित्व करनेवाला बीएसई सेंसेक्स इस समय 22.64 के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा है। यह कमोबेश वही स्तर है जिसके बाद 2008 में बाज़ार धड़ाम से गिर गया था। इससे ज्यादा मूल्यांकन वो 2000 में गया था, जिसके बाद डॉटकॉम का बुलबुला फूटा था। साफ है कि इस बार भी देर-सबेर बाज़ार को गिरना ही है। इसलिए निवेश में हड़बड़ी करने के बजाय इंतज़ार करना सही होगा। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

वही बाज़ार, वही कंपनी, वही शेयर, वही चार्ट। फिर अलग-अलग व्याख्या और राय क्यों? टेक्निकल एनालिसिस की दुरूह किताबें और सैकड़ों इंडीकेटर इतना भ्रम फैला देते हैं कि चार्ट साफ दिखने के बावजूद तस्वीर एकदम धुंधली हो जाती है। कभी कोई इंडीकेटर काम करता दिखता है तो अगले ही सौदे में वह फेल हो जाता है। फिर हम किसी चमत्कारी मंत्र की तलाश में भागते-भागते मृग मरीचिका में फंस जाते हैं। अब करते हैं शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी

व्यवहार में जो भी हो, सिद्धांततः हम शेयर बाज़ार में उन्हीं सूचनाओं के आधार पर ट्रेड कर सकते हैं जो सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध हैं। फिर, हरेक सूचना शेयर के भावों में झलक जाती है। अगर हम भावों की चाल पढ़ना सीख लें तो सफलता की कुंजी मिल जाएगी। भावों की सारी हरकत चार्ट पर झलकती है। ये चार्ट तमाम इंडीकेटरों के साथ बीएसई व एनएसई की साइट पर मुफ्त में उपलब्ध हैं। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

कानून कहता है कि अगर कंपनी का कोई भी प्रवर्तक, कर्मचारी या बैंकर व संस्थाएं अंदर की अघोषित सूचना के आधार पर ट्रेड करता पाया गया तो उसे इनसाइडर ट्रेडिंग के अपराध की सज़ा भुगतनी होगी। पूंजी बाज़ार नियामक संस्था, सेबी इस गुनाह में रिलायंस इंडस्ट्रीज़ जैसी रसूखदार कंपनी तक पर करीब 1000 करोड़ रुपए का जुर्माना लगा चुकी है। अमेरिका में तो इस अपराध में जेल भी जाना पड़ सकता है। अब चलाएं बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग से कमाना जानकारियों का खेल है। जिसके पास कंपनी के बारे में जितनी सटीक जानकारी, वो उससे उतना ही ज्यादा फायदा उठा सकता है। मगर, सारा बाज़ार ऐसे नियमों से बांधा गया है कि हर किसी को समान मौका मिल सके। मसलन, कंपनी के बारे में सबसे ज्यादा जानकारी उसके प्रवर्तकों, बैंकरों या उनसे जुड़ी वित्तीय संस्थाओं को होती है। लेकिन ऐसी सूचनाओं पर ट्रेड करना कानूनन गुनाह है। अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी

बाज़ार में आईपीओ की भरमार है। कंपनियां छोटे-बड़े निवेशकों से 1000 करोड़ रुपए जुटा चुकी हैं। आगे 5000 करोड़ रुपए तक जुटा सकती हैं। डीमार्ट के निवेशकों की मौज चल रही है। हो सकता है कि सीडीएसएल में भी ऐसा हो जाए। करीब दस साल पहले 2007-08 में भी ऐसा ही माहौल था। याद करें। रिलायंस पावर की दीवानगी। लेकिन उसके बाद सेंसेक्स व निफ्टी 60% से ज्यादा गिर गए थे। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी