धंधे की दुनिया है। यहां कुछ भी मुफ्त नहीं। लेना-देना ही व्यवहार है। जहां मुफ्त मिलता है, वहां आप ही बिकाऊ माल या सेवा हो। तरीके बदल गए, लेकिन धंधा बदस्तूर जारी है। ईमेल, सोशल मीडिया, ऑनलाइन स्टोरेज़ और न जाने कितने ऐप्प। सब मुफ्त। कैश में कोई अदायगी नहीं। लेकिन वे आपकी ही नहीं, आपके दोस्तों तक की सारी जानकारी खींच लेते हैं ताकि आपको बेचा जा सके, मनमाफिक दुहा जा सके। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

निफ्टी इस साल 29 जनवरी के ऐतिहासिक शिखर 11,171.55 से 16 मार्च के सबसे निचले स्तर 9951.90 तक 10.92% गिर चुका है। उस दिन एनएसई में 312 कंपनियों ने 52 हफ्तों की तलहटी पकड़ ली। इनमें स्टेट बैंक, अंबुजा सीमेंट्स, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, अडानी पावर, कैडिला, ल्यूपिन, पीएफसी, सीमेंस व टाटा मोटर्स जैसी कई नामी कंपनियां शामिल हैं। लेकिन 52 हफ्तों का न्यूनतम स्तर ही सुरक्षित निवेश का पैमाना नहीं है। अब तथास्तु में आज की कंपनी…और भीऔर भी

उलटा-सीधा खा-पी लिया तो शरीर का सारा रासायनिक संतुलन बिगड़ जाता और लयताल टूट जाती है। इसी तरह खबरें किसी स्टॉक का सारा पैटर्न बिगाड़ देती हैं। तब कोई गणित या समीकरण नहीं चलता। दुलकी चाल में चलता स्टॉक एकबारगी ऐसा फिसलता या उछलता है कि कोई पकड़ नहीं पाता। अपने यहां प्रमोटर या पहुंचवाले लोग रोक के बावजूद खबरों पर खेलते हैं। इसलिए हमें खबरों के दिन ट्रेडिंग से दूर रहना चाहिए। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी

ट्रेडिंग का मूल है भावों के उतार-चढ़ाव से कमाना। इसलिए दिमाग में स्पष्ट होना चाहिए कि शेयरों के भाव बढ़ते या गिरते क्यों हैं? अर्थव्यवस्था या कंपनी में बेहतरी की आशा है या जेब में जमकर नोट हों तो सभी खरीदना चाहते हैं। बेचनेवाले इस चाहत का फायदा उठाकर भाव चढ़ाते जाते हैं। वहीं, निराशा के आलम में हर कोई निकलना चाहता है तो जो भी दाम मिले, उस पर बेच डालता है। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

शेयरों के उठते-गिरते भावों, उनकी धड़कन और लय में सारा रहस्य छिपा है। लेकिन हम अपने मन में पहले से बैठी धारणाओं के चलते उसे पकड़ नहीं पाते। जब हम भावों की लय पर ध्यान लगाते हैं तो मन की धारणाएं पिघलने लगती हैं और उस शेयर का सच्चा स्वभाव हमें साफ-साफ दिखने लगता है। यही वह ज्ञान है जिसके आधार पर शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग से नियमित कमाई की जा सकती है। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

हमें उन्हीं शेयरों में ट्रेडिंग करनी चाहिए जिनमें अच्छा कारोबार होता है। ऐसे स्टॉक्स चुनने के लिए अलग से मशक्कत की जरूरत नहीं है क्योंकि स्टॉक एक्सचेंजों के सूचकांक में ऐसे स्टॉक्स ही रखे जाते हैं। अपने माफिक कुछ स्टॉक्स इनमें से चुन लें। फिर उनके साप्ताहिक व दैनिक भावों के चार्ट पर बराबर ध्यान देना शुरू कर दें। दो-चार टेक्निकल इंडीकेटरों की मदद से विश्लेषण करें। धीरे-धीरे लय पकड़ में आने लगेगी। अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी

सांसों का आना-जाना रुक जाए तो जिंदगी थम जाती है। इसी तरह किसी स्टॉक में खरीद-बिक्री बंद हो जाए तो वह एक तरह से मरने लगता है। और, जो मरने लग गया, उससे कैसी अपेक्षा, काहे की उम्मीद। इसीलिए जिस स्टॉक में इतनी कम ट्रेडिंग हो कि वह ठंडा पड़ गया हो, उनमें कभी ट्रेडिंग की कोशिश नहीं करनी चाहिए। कभी गलती से खरीद लिया तो वह आपके गले की हड्डी बन जाएगा। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

एफडी में निवेश गेहूं-धान लगाकर सीजन-सीजन फसल काट लेने जैसा है। वहीं, शेयर बाज़ार में लिस्टेड संभावनामय कंपनियों में निवेश पेड़ लगाने जैसा है जिसका फायदा आपके बाद आपके परिजन भी उठा सकते हैं। इसलिए ज़रूर सोचें कि क्या आपने अपने समय में उभरती कंपनियों को देख-समझकर उनके मालिकाने का सीमित हिस्सा खरीदा या नहीं। याद रखें कि मौजूदा दौर में दौलत बनाने का सबसे उपयुक्त माध्यम अच्छी कंपनियां हैं। अब तथास्तु में एक और संभावनामय कंपनी…औरऔर भी

शिक्षा या रोज़गार के लिए देशों की सीमाएं खत्म हो रही हैं। इस तरह ग्लोबल होती दुनिया में कम से कम शेयर बाज़ार तो ग्लोबल हो ही चुके हैं। इसलिए ट्रेडिंग के आगाज़ से पहले विश्वबाज़ार पर नज़र डाल लेना ज़रूरी है। अमेरिका के डाउ जोन्स और S&P-500 सूचकांक की स्थिति कल क्या रही? आज ऑस्ट्रेलिया व एशिया के बाज़ारों का क्या हाल है? सारा कुछ गूगल फाइनेंस पर लाइव मिल जाता है। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

कुछ प्रोफेशनल ट्रेडर लंबे समय के निवेश का मज़ाक उड़ाते हुए कहते हैं कि जब खरीदा गया शेयर बढ़ने के बजाय गिरता ही जाता है तो लोग मजबूरन लंबे निवेशक बन जाते हैं। लेकिन आम ट्रेडर के लिए अच्छी रणनीति यह होगी कि वह फंडामेंटल रूप से मजबूत कंपनियों के ही शेयर खरीदे। गिरे तो और ज्यादा खरीद ले। साथ ही 15-20 दिन नहीं, बल्कि पोजिशनल ट्रेड करे और मुनाफा कमाकर ही निकले। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी