किसी भी काम में कामयाबी के लिए सहजता व अपने पर विश्वास बहुत ज़रूरी है। लेकिन शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग से नियमित कमाने के वास्ते रिटेल ट्रेडर के लिए ये दोनों ही बातें बड़ी नुकसानदेह होती हैं। कारण, जिस भी तरीके से हमारा विकास हुआ है, उसमें सहजता से निकला इन्ट्यूशन बाज़ार में हमेशा गलत सिग्नल देता है। यहां सफलता का एकमात्र सूत्र है बैंकों, संस्थाओं व प्रोफेशनल ट्रेडरों के सिग्नल को पकड़ना। अब सोम का व्योम…औरऔर भी

देश में राजनीति की खींचतान और दुनिया में अमेरिका व चीन के बीच व्यापार युद्ध। शेयर बाज़ार में फिलहाल अनिश्चितता छाई है। मुमकिन है कि एक कदम आगे, दो कदम पीछे चलता बाज़ार अगले कुछ महीनों में काफी गिर जाए। लेकिन लंबे समय के निवेशकों को इस पर दुखी होने के बजाय खुश होना चाहिए क्योंकि ज़रूरत से ज्यादा चढ़े हुए अच्छी कंपनियों के शेयर सुरक्षित रेंज में आ जाएंगे। अब तथास्तु में एक और जानदार कंपनी…औरऔर भी

शेयर बाज़ार के व्यापक मायाजाल में रिटेल ट्रेडरों का अपना अलग स्थान है, बशर्ते वे शांत भाव से अनुशासन व अभ्यास से अपना सिस्टम विकसित कर लें। किसी सलाह पर आंख मूंदकर चले तो कभी अपना सिस्टम नहीं बना सकते। रोज़ाना डायरी में लिखना होगा कि कोई सौदा क्यों किया। अगर लिखा कि फलांने के बताने पर सौदा किया तो सीखेंगे कैसे! खुद को बराबर सुधारते जाने से ही पुख्ता सिस्टम बनता है। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

ट्रेडिंग से नियमित कमाना है तो हमेशा के लिए गांठ बांध लीजिए कि कभी भी टिप्स के चक्कर में नहीं पड़ना। दरअसल, शेयर बाज़ार में भांति-भांति के ‘हिंसक’ जीव सक्रिय हैं। उनका पूरा तंत्र है जो निरीह निवेशकों व ट्रेडरों को शिकार बनाता है। वो बड़ी-बड़ी बातों के ज़रिए लालच का जाल फैलाते हैं। इनसे अलग बैंकों, संस्थाओं व प्रोफेशनल ट्रेडरों का समूह है जो शांति और पूरे अनुशासन से बराबर कमाता है। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

ट्रेडिंग करते हैं तो किसी न किसी डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट या ब्रोकर के पास आपका डिमैट एकाउंट होगा। वो बराबर आपको मेल या एसएमएस पर ट्रेडिंग व निवेश की चटपटी सलाह भेजता ही होगा। अक्सर ये सलाहें पहले से चढ़े हुए स्टॉक को खरीदने की होती हैं। साथ ही तमाम पेन्नी स्टॉक्स को बड़ी मात्रा में खरीदने की मुफ्त सलाह आपको भी एसएमएस से मिलती होगी। इनका मकसद आपकी जेब खाली करना होता है। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

रोज़ाना शेयर बाज़ार में औसतन 1800 से ज्यादा कंपनियों में सक्रिय ट्रेडिंग होती है। इनमें से एक-दो कंपनी को चुनना काफी मुश्किल है। बाहरी सेवा इसे आसान बनाने में आपकी मदद कर सकती है। लेकिन उस पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं कर सकते क्योंकि ट्रेडिंग के लिए स्टॉक चुनने का कोई त्रुटिहीन फॉर्मूला है ही नहीं। इसमें भी अगर आप ब्रोकरों की सेवा के चक्कर में पड़ गए, तब तो बेवजह निपट जाएंगे। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

अगर आप ट्रेडिंग के लिए स्टॉक चुनने और उसमें ट्रेडिंग क्यों करनी है, इसका फैसला खुद करने का ज़िम्मा उठाने को तैयार नहीं हैं तो आप हज़ार से लेकर लाख रुपए तक की कोई सेवा ले लें, आप बाज़ार से नियमित कमाई नहीं कर सकते। शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग से कमाई करना शेर के जबड़े से शिकार निकालने जैसा मुश्किल काम है। इसे आसान समझना अपने पैर में कुल्हाड़ी मारने जैसा काम होगा। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

बीते वित्त वर्ष 2017-18 में बीएसई में लिस्ट कंपनियों का बाज़ार पूंजीकरण 20.7 लाख करोड़ रुपए बढ़ गया। इस तरह निवेशकों की दौलत 17.03% बढ़ी है। वो भी तब, जब बाज़ार दो महीने पहले हासिल शीर्ष शिखर से नीचे आ चुका है। वहीं, सेंसेक्स पूरे वित्त वर्ष में 11.3% बढ़ा है, जबकि 29 जनवरी के शिखर तक इसकी बढ़त 22.5% थी। उसके बाद वह 9.5% नीचे आया है। अब तथास्तु में नए वित्त वर्ष की पहली कंपनी…औरऔर भी

कोई गिरा हुआ शेयर हमारे जैसे हज़ारों लोग भी खरीद लें तो वह गीली फुलझड़ी की तरह ज़रा-सा जलकर फिर बुझ जाएगा क्योंकि निकलने की ताक में लगे पिछले खरीदार भाव बढ़ने पर बेचने लग जाएंगे। शेयर तभी बराबर बढ़ता है जब उसमें बैंकों, म्यूचुअल फंडों व बीमा कंपनियों जैसी संस्थाओं और प्रोफेशनल ट्रेडरों की खरीद आने लगती है। परखें कि बेचने को बचे हैं कितने बेताब और संस्थाएं खरीद शुरू करेंगी क्या! अब बुध की बुद्धि…औरऔर भी

अगर दक्ष प्रबंधन और मजबूत मूलाधार वाली कंपनी का शेयर गिर गया हो तो उसके निवेश करना लंबे समय में फायदे का सौदा साबित हो सकता है। लेकिन कोई शेयर अगर छह-आठ महीने से बराबर गिरता जा रहा है तो सस्ता समझकर उसमें ट्रेडिंग करना बड़ा महंगा पड़ता है। मगर, क्या किया जाए! दूध के जले भी पेन्नी स्टॉक्स के चक्कर में पड़ जाते हैं। ट्रेडिंग और निवेश के बुनियादी सूत्र भिन्न हैं। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी