ट्रेडिंग के लिए बाहर की सलाहें तभी तक ज़रूरी होती हैं, जब तक आपका आत्मविश्वास नहीं बन जाता। उसी तरह जैसे बच्चों की साइकिल में सीखते समय पीछे के पहिए के अगल-बगल दो छोटे पहिए लगे होते हैं। आत्मविश्वास जमने के बाद किसी एक्सपर्ट की सलाह की दरकार नहीं होती। गांठ बांध लीजिए कि अचूक सलाह देने का दावा करनेवाले दरअसल सलाह बेचने का धंधा कर रहे हैं, आपको फायदा पहुंचाने का नहीं। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

जो जिंदगी सिखा देती है, वो किताबें कभी नहीं सिखा सकतीं। वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग पर दुनिया के कितने भी सफल ट्रेडरों की किताब पढ़ लीजिए, टेक्निकल एनासिसिस का महंगे से महंगा कोर्स कर लीजिए, फिबोनाची नंबरों का सारा गणित सोख लीजिए, लेकिन बाज़ार से नियमित कमाई का कौशल आपको अपने अनुभव से ही सीखना होता है। फिर एक बार सीख लिया तो वह साइकल या कार चलाने जैसा आसान हो जाता है। अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी

डर और चिंता की भावना का कोई तुक-तर्क नहीं होता। उन्होंने घेर लिया तो किसी दूसरे के समझाना कोई काम नहीं आता। सारा पढ़ा-लिखा भूल जाता है। तनाव चढ़ता ही चला जाता है। इससे मुक्ति के लिए हमें खुद डर व चिंता की भंवर से निकलना पड़ता है। यह आसान नहीं। लेकिन आसान काम यह है कि हम जब भी चिंताग्रस्त या डरग्रस्त हों तो वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग से एकदम दूर रहें। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

अर्थव्यवस्था के आंकड़े जो निराशाजनक तस्वीर पेश कर रहे हैं, वह नौकरीपेशा लोगों से लेकर काम-धंधे में लगे उद्यमियों तक में झलकने लगी है। कहीं से उजाले की किरण नहीं दिख रही। औद्योगिक उत्पादन व रोज़गार घटने के बाद अब मुद्रास्फीति भी बढ़ने लगी है। लेकिन इस निराशा के बीच याद रखें कि 1991 में तो इससे कहीं ज्यादा बदतर स्थिति थी। इसलिए निवेश के मौके अब भी हैं। आज तथास्तु में ऐसा ही एक मौका…और भीऔर भी

बुद्धि के साथ रहना है है कि खुद को भावनाओं में बहकने से बचाना पड़ेगा। भावनाएं भी बहुत सारी नहीं। केवल लालच और डर की भावना को साधना है। साथ ही अपने अहं की भावना पर काबू पाना है। भावनाओं पर काबू पाने के लिए अपने स्वभाव को समझना ज़रूरी है। फिर इसे समझने के बाद उसमें आवश्यक बदलाव करने होंगे। तरीका यह भी है कि अपने स्वभाव के माफिक स्टॉक्स चुने जाएं। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

शेयर बाज़ार में सारा खेल अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखते हुए दूसरों की भावनाओं को समझने और उसका फायदा उठाने का है। यह सुनने में बड़ा निर्मम लगता है। लेकिन युद्ध और बाज़ार में ऐसी ही निर्ममता चलती है। दूसरों की भावना भावों के चार्ट पर दिख जाती है। चार्ट देखना आ जाए तो आपको साफ दिखने लगेगा कि कहां भावनाएं और कहां बुद्धि सक्रिय है। आपको हमेशा बुद्धि के साथ रहना है। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

भावनाएं अस्थिर हों, किसी भी वजह से उनमें उबाल या सुस्ती आई हो तो हमारी बुद्धि नहीं काम करती। हम अधीर हो जाते हैं। यह ऐसी अवस्था है जब कोई भी वित्तीय बाज़ार में आपको शिकार बना सकता है, भले ही आप कितने बड़े महारथी क्यों न हों। इसीलिए नियम है कि जब भी घर-परिवार या दोस्तों से झगड़ा हुआ हो, तब ट्रेडिंग से दूर रहें। अन्यथा, आप अपना नुकसान कर बैठते हैं। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

भावनाओं का सारा समीकरण बाज़ार के भावों में दिख जाता है। इनका सारा ग्राफ भावों के दैनिक और साप्ताहिक चार्ट में झलकता है। ऊपर से कुछ दिन, हफ्तों, महीनों व सालों के मूविंग औसत का गणित बाज़ार में सक्रिय भावनाओं का सामूहिक पैटर्न बता देता है। दस-बीस साल पहले यह हिसाब-किताब लगाना बेहद कठिन था। आज सब कुछ कंप्यूटर के चंद बटन कर देते हैं। हमारा काम बुद्धि और धैर्य का इस्तेमाल है। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

शेयर बाज़ार का स्वरूप गणितीय है। लेकिन वहां हर पल काम करनेवाली मानव भावनाएं अक्सर सारा गणित फेल कर देती हैं। कहने का मतलब यह नहीं कि भावनाओं का कोई गणित या समीकरण नहीं होता। डर और लालच की भावना का तो सीधा गणित होता है। लेकिन जब ये शेयर बाज़ार में काम करती हैं, जहां आज एक नहीं, अनेक देशों के लाखों ट्रेडर सक्रिय होते हैं तो समीकरण रैखिक नहीं रह जाता। अब सोमवार का व्योम…और भीऔर भी

न जीवन और न ही बाज़ार में हमेशा मनचाहा होता है। सभी चाहते हैं कि अर्थव्यवस्था तेज़ी से बढ़े। लेकिन लगातार सात तिमाहियों से उसकी विकास दर घटती जा रही है। उम्मीद थी कि रिजर्व बैंक विकास को बढ़ाने के लिए ब्याज घटा देगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। हर कोई चाहता है कि जिन शेयरों में उसने धन लगाया है, वे बराबर बढ़ते रहें। लेकिन ऐसा नहीं होता। निवेश की इस हकीकत के बीच एक और कंपनी…औरऔर भी