इस हकीकत से इनकार नहीं कि वित्तीय बाजार में गिरने के वक्त जमकर कमाया जा सकता है। बहुतेरे ट्रेडर हैं जिन्होंने शॉर्ट-सेलिंग से करोड़ों कमाए हैं और अब भी कमा रहे हैं। लेकिन यह शॉर्ट-सेलिंग डेरिवेटिव सौदों में ही संभव है जिसके लिए काफी पूंजी चाहिए। इतनी कि चार-पांच लाख डूब जाएं तो कोई फर्क न पड़े। इतना भारी रिस्क जमकर रिटर्न देता है। लेकिन क्या रिटेल ट्रे़डर इतना जोखिम उठा सकता है? अब बुधवार की बुद्धि…और भीऔर भी

रिटेल ट्रेडर ज्यादा रिस्क नहीं ले सकता। उसके पास सीमित पूंजी होती है जो अगर डूब गई तो रिस्क छोड़िए, वह ट्रेडिंग ही नहीं कर सकता। उसे दो सार्वकालिक नियमों का पालन करना होता है। पहला नियम, हमेशा अपनी पूंजी को सुरक्षित रखना और दूसरा नियम, हमेशा पहले नियम को याद रखना। इस समय शेयर बाज़ार में रिस्क अपने अधिकतम स्तर पर पहुंचा हुआ है तो न्यूनतम रिस्क की कोई गुंजाइश ही नहीं। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

शेयर बाज़ार में कोई सनसनी का आनंद लेने नहीं, कमाने आता है। संस्थाओं के पास रिस्क प्रबंधन का पूरा सिस्टम, बैक-एन्ड होता है। लेकिन रिटेल ट्रेडर को खुद ही इस सिस्टम का भी इंतज़़ाम करना होता है। वह बाज़ार के उतार-चढ़ाव के आनंद में सराबोर होना कतई गवारा नहीं कर सकता है। उसका स्पष्ट मकसद होना चाहिए, न्यूनतम रिस्क में अधिकतम कमाना। उसकी मजबूरी है कि वह ज्यादा रिस्क ले ही नहीं सकता। अब सोम का व्योम…औरऔर भी

इस समय शेयर बाज़ार की स्थिति साल 2008 जैसी हो गई है। वैसी ही निराशा हर तरफ छाई है। कोरोना वायरस का कहर कितना तबाही मचाएगा, पता नहीं। शुक्रवार को बाज़ार खुलने के 5 मिनट के भीतर ही निवेशकों के 5 लाख करोड़ रुपए उड़ गए। निवेशक घबराकर शेयरों से सोने की तरफ भाग रहे हैं। लेकिन समझदारी की बात करें तो यही वक्त है अच्छी कंपनियों में निवेश का। अब तथास्तु में आज की कंपनी…और भीऔर भी

बाज़ार को ट्रेडिंग सत्र के बाद ढोना नहीं चाहिए। जब तक ट्रेडिंग की और उसके ऊपर दो-तीन घंटे की तैयारी। इसके बाद ज़िंदगी अपनी। घर-परिवार से लेकर दूसरे भी महत्वपूर्ण काम हैं! लेकिन अगर छुट्टी के चलते कई दिनों से वित्तीय बाज़ार की लय-ताल से दूर हैं तो मौके की नब्ज़ को पकड़ने के लिए कुछ अतिरिक्त पढ़ना-लिखना और तैयारी करनी पड़ेगी। यह खाला का घर नहीं कि अचानक सिर उठाकर घुस लिए। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

आप ट्रेडिंग का जो भी तरीका अपनाएं, उसके लिए दो-तीन घंटे की तैयारी ज़रूरी है। सोमवार से शुक्रवार हर दिन छह घंटे के ट्रेडिंग सत्र से पहले चाहे अल-सुबह या पिछले दिन की शाम को इतना वक्त बाजा़र के अपडेट और स्टॉक के चयन के लिए देना पर्याप्त है। बाहरी सेवा लेते हैं, तब भी आपको अपनी तरफ से इतना समय तो देना पड़ेगा। तभी आप रिस्क-रिवॉर्ड को समझते हुए सौदा कर पाएंगे। अब गुरुवार की दशा-दिशा…और भीऔर भी

अहम सवाल है कि वित्तीय बाज़ार में उतरने की वाजिब तैयारी क्या है? अगर आप टेक्निकल एनालिसिस के आधार पर ट्रेडिंग करते हैं या स्क्रीन पर भावों के उतार-चढ़ाव पर दांव लगाते हैं या समाचारों पर आधारित ट्रेड करते हैं तो क्या तीनों अलग-अलग तरीकों में बाज़ार की अद्यतन स्थिति से वाकिफ हैं कि नहीं? अगर हैं तो तैयारी वाजिब है, अन्यथा नहीं। इसके ऊपर से कितना रिस्क ले रहे हैं, यह जानना। अब बुधवार की बुद्धि…और भीऔर भी

अचानक कुछ ऐसा घट जाता है जिसके बारे में किसी ने दूर-दूर तक सोचा भी नहीं था। यह अनिश्चितता आमजीवन में चलती है और लोगबाग इसका सदमा झेलते रहते हैं। लेकिन वित्तीय बाज़ार में तो सभी इसी अनिश्चितता या रिस्क से खेलने आते हैं। कहा जाता है कि रिस्क जितना ज्यादा, रिवॉर्ड या प्रतिफल उतना ज्यादा। लेकिन ध्यान रहे कि बिना वाजिब तैयारी के उतरने पर बाज़ार आपके कपड़े उतरवा लेता है। अब मंगलवार की दृष्टि…और भीऔर भी

वित्तीय बाज़ारों के बारे में अमिट सच है कि यहां पहले से कुछ भी निश्चित नहीं। इस बाज़ार में आप उतरते हैं तो समझिए कि अनिश्चितता की भंवर में छलांग लगा रहे हैं। इसमें से कुछ भी माणिक, मोती निकालकर लाने के लिए आपको तैराक ही नहीं, कुशल तैराक होना ज़रूरी है। नहीं तो धारा में जमे बड़े-बड़े मगरमच्छ आपको आसानी से शिकार बना डालेंगे। लालच किया या डरकर भागे तो पक्का मरोगे। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

भारतीय अर्थव्यवस्था की आंतरिक ताकत इतनी जबरदस्त है कि सरकार गलत से गलत नीतियां अपना लें, फिर भी यह पलटकर उठ खड़ी होती है। सरकार की अनीति और सच्चाई को ही नकारने के चलते हमारी आर्थिक विकास दर घटती जा रही है। लेकिन आश्चर्य है कि जनवरी 2020 में हमारा परचेजिंग मैनेजर्स सूचकांक (पीएमआई) आठ साल के रिकॉर्ड शिखर पर पहुंच गया। मतलब, देश का मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र उठने लगा है। अब तथास्तु में आज की कंपनी…और भीऔर भी