जीवन, युद्ध या ट्रेडिंग में कोई भी रणनीति हमें अपनी सीमाओं और संसाधनों को ध्यान में रखते हुए बनानी चाहिए। अन्यथा हम नाकाम होने को अभिशप्त हैं। वित्तीय बाज़ार में ट्रेडिंग का मूल मकसद है कम से कम रिस्क और कम से कम समय में अधिकतम कमाना। इसके लिए हम किसी को अपने टेम्परामेंट के हिसाब से ट्रेडिंग सिस्टम बनाना होता है। यहां तक ट्रेडिंग के स्टॉक्स भी अपने माफिक चुनने होते हैं। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

कोई शेयर आगे कहां तक जाएगा, कब तक जाएगा, इसको लेकर ट्रेडर, दीर्घकालिक निवेशक या यूं ही दांव लगा रहे सटोरिये की धारणा या गणना अलग-अलग होती है क्योंकि धन लगाने की इनकी समयसीमा भिन्न होती है। बाज़ार का सच अगर इनकी सोच से मेल खा जाए या आगे निकल जाए तो फायदा ही फायदा, अन्यथा घाटा। सारा खेल वर्तमान के सच और भविष्य की सोच व सच के अंतर का है। अब तथास्तु में आज कीऔरऔर भी

आज 14 नवंबर 2020 को पड़ रही दीवापली से शुरू हो रहा है नया साल, सम्वत 2077। इस मौके पर बीएसई और एनएसई में शाम को 6.15 बजे से 7.15 बजे तक मुहूर्त ट्रेडिंग सत्र हो रहा है। इससे पहले 8 मिनट का प्री-ओपन सत्र होगा जिसमें 6 बजे से 6.08 बजे तक ऑर्डर इकट्ठा और मैच किए जाएंगे। ब्लॉक सौदों का सत्र शाम 5.45 बजे से 6 बजे तक चलेगा। बाज़ार में कवर और ब्रैकेट ऑर्डरोंऔरऔर भी

इस साल कोरोना संकट के उभरने के बाद विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक हमारे शेयर बाज़ार में अब तक 1.20 लाख करोड़ रुपए लगा चुके हैं। इसी दौरान रिलायंस ने जियो प्लेटफॉर्म और रिटेल उद्यम के लिए विदेशियों से 2.07 लाख करोड़ रुपए जुटाए हैं। आखिर विदेशी निवेशकों के पास इतना इफरात धन कहां से आ रहा है और वे क्यों पिछले छह सालों में तबाह हो चुकी भारतीय अर्थव्यवस्था पर दांव लगा रहे हैं? अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

कोविड-19 के प्रकोप के बाद दुनिया के वित्तीय जगत का विचित्र हाल है। तमाम देशों के केंद्रीय बैंकों द्वारा छापे गए नोटों से उपजे सस्ते धन का प्रवाह भारत जैसे देशों के शेयर बाज़ारों में आ रहा है। पिछले नौ महीनों में हमारे बाज़ार में इतना विदेशी धन आया है, जितना पिछले बारह सालों में नहीं आया था। हमारे कैश सेगमेंट में एफआईआई/एफपीआई निवेश कोरोना के मामलों जैसी रफ्तार से बढ़ता ही गया। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

शेयर बाज़ार शिखर से नए शिखर की यात्रा पर निकल चुका है। निफ्टी-50 सूचकांक 23 मार्च को कोरोना-कहर में तलहटी पकड़ने के बाद अब तक 68.34% बढ़ चुका है। ध्यान रहे कि दो ही कारकों से शेयरों के भाव और बाज़ार सूचकांक बढ़ते हैं। एक, धन का प्रवाह और दो, बाजार में लिस्टेड कंपनियों की बिजनेस बढ़ाने की क्षमता। कोरोना काल में दूसरा कारक दम तोड़ चुका है। केवल पहला कारक हावी है। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

बाज़ार में बवाल। निफ्टी-50 नए ऐतिहासिक शिखर पर। अभी कितना और चढ़ सकता है? वह 35 के पी/ई तक चला गया तो सेंसेक्स पहले 50 तक के पी/ई तक जा चुका है। निवेशक फिलहाल एक रुपए की कमाई पर 35 रुपए दे रहे हैं तो पहले इसकी खातिर 50 रुपए भी दे चुके हैं। सवाल उठता है कि जब अर्थव्यवस्था में हर तरफ मुर्दनी छाई है, कंपनियां लस्त-पस्त हैं, तब ऐसी मदहोशी क्यों? अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

शेयर बाज़ार में उफान छाया है। निफ्टी अब तक के ऐतिहासिक शिखर से मात्र 2.25% दूर है। यही नहीं, पिछले महीने 14 अक्टूबर को निफ्टी का पी/ई अनुपात 34.87 के सर्वोच्च स्तर तक चला गया था। मतलब, निवेशक निफ्टी-50 में शामिल कंपनियों की 1 रुपए औसत कमाई के लिए 34.87 रुपए दाम देने को तैयार हैं। निफ्टी के लंबे समय के पी/ई का औसत 20 है। आखिर, औसत से 75% ज्यादा दाम क्यों? अब सोम का व्योम…औरऔर भी

दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और सर्व-स्वीकृत मुद्रा डॉलर का देश होने के कारण अमेरिका हमारे लिए बहुत खास है। साथ ही बाइडन की जीत और ट्रम्प की हार ने दिखा दिया कि झूठ की उम्र बड़ी छोटी होती है। झूठों के सरताज़ ट्रम्प आखिरी समय तक झूठ बोलते रहे, लेकिन टांय-टांय फिस। इसी तरह ट्रेडिंग में भले ही झूठ चल जाए, लेकिन लंबे निवेश में हमेशा सच ही चलता है। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

आप शेयर बाज़ार की ट्रेडिंग से अपना और घर-बार का ठीकठाक गुजारा करना चाहते हैं तो महीने में औसतन एक लाख रुपए कमाने होंगे। इस पर बिजनेस का टैक्स भी लगेगा। महीने में 20 दिन ट्रेडिंग तो ऐसे हर दिन आपको 5000 रुपए कमाने होंगे। लेकिन हर दिन इतना कमा नहीं सकते। कभी घाटा, कभी फायदा। इसलिए दिन में कई बार सौदे काटने और करने पड़ेंगे तो निफ्टी या बैंक निफ्टी नहीं जमेंगे। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी