मोदी सरकार गरीबों, किसानों व आमलोगों का भला करने का दावा करती है, लेकिन हकीकत में वह अमीरों व कॉरपोरेट्स का ही भला कर रही है। मसलन, वितरित लाभांश पर पहले कंपनियों को सेस-सरचार्ज मिलाकर 20.56% टैक्स देना पड़ता था। लेकिन इस साल से उन्हें नहीं, बल्कि शेयरधारकों को लाभांश पर टैक्स देना पड़ेगा। सरकार ने कंपनियों के भले के लिए आम निवेशकों को दबाया, खुद भी घाटा उठाया। आज तथास्तु में जमकर लाभांश देनेवाली एक कंपनी…औरऔर भी

टेक्निकल एनालिसिस पर बहुत सारी जानकारी आपको इंटरनेट पर मिल जाएगी। उनका अभ्यास आप बीएसई या एनएसई की साइट पर मुफ्त में उपलब्ध चार्टिंग सुविधा से कर सकते हैं। वहां आप हरेक इंडीकेटर आजमाकर देख सकते हैं। आरएसआई केवल भावों के दैनिक चार्ट का मायने रखता है; 30 के आसपास तो खरीद और 70 से ऊपर तो बिकवाली की आशंका। लेकिन भाव तय करने का असली कारक है बैंकों व संस्थाओं का रवैया। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

कैंडल का आकार ही नहीं, चार्ट पर उनकी पोजिशन भी अहमियत रखती है। हैमर सबसे नीचे और रिवर्स हैमर सबसे ऊपर होने पर सबसे ज्यादा प्रभावशाली होता है। बीच में इधर-उधर कहीं हों तो उनका खास मायने-मतलब नहीं होता। कैंडल के अलावा टेक्निकल एनालिसिस में हम ज्यादा नहीं, बस दो-तीन इंडीकेटर की समझ बनाकर अभ्यास कर लें तो काम भर की स्पष्टता आ जाती है। इसमें आरएसआई और मूविंग औसत सबसे अहम हैं। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

बाज़ार में हमेशा खरीदे-बेचे गए शेयरों की सख्या बराबर होती है। खरीदनेवालों का जोश ज्यादा तो उसके भाव बढ़ते हैं, जबकि बेचनेवाले हावी तो भाव गिरते हैं। किसी दिन हुई ट्रेडिंग में भावों ने चार्ट पर कैसा कैंडल बनाया है, इसके संकेत मिलता है कि तेजड़ियों का पलड़ा भारी है या मंदड़ियों का। इसमें भी कैंडल का रंग नहीं, आकार खास मायने रखता है। हथौड़ा/हैमर तो तेज़ी। रिवर्स/इन्वर्टेड हैमर या लट्टू तो मंदी। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

अगर आपने शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग करने की ठान ही ली है तो पूंजी लगाने व बचाने के साथ ही कुछ बुनियादी काम आपको करने होंगे। इसमें से पहला है टेक्निकल एनालिसिस का व्यावहारिक अध्ययन। इसके दम पर आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि किसी स्टॉक में किन भावों पर खरीद का पलड़ा भारी हो सकता है और कहां बिकवाली का। अमूमन इसी के आधार पर स्टॉक की अगली चाल तय होती है। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

जमे-जमाए ईमानदार वित्तीय सलाहकार मानते हैं कि आम लोगों को शेयर बाज़ार में वही धन लगाना चाहिए जो आवश्यक ही नहीं, आकस्मिक ज़रूरतों तक के इंतज़ाम के बाद इफरात बचता है। इसमें से भी 95% निवेश में लगाना चाहिए और केवल 5% ट्रेडिंग में। ट्रेडिंग के लिए न्यूनतम अगर 5 लाख रुपए चाहिए तो सिद्धांततः उनके पास एक करोड़ रुपए इफरात होने चाहिए। लेकिन आम आदमी का दिल है कि मानता ही नहीं! अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

शेयरों के भाव का चक्र चलता है। इसी चक्र की बदौलत निवेशक और ट्रेडर उसमें धन लगाकर कमाते हैं। बिजनेस अच्छा चलता रहा और शेयरों की मांग बनी रही तो उतार-चढ़ाव से गुजरते शेयर का ग्राफ हमेशा ऊपर ही ऊपर उठता है। बिजनेस खराब हुआ तो उतार-चढ़ाव के गुजरता शेयर अंततः डूबता चला जाता है। कंपनियां का बिजनेस भी उतार-चढ़ाव से गुजरता है। कोई-कोई कंपनी डूबते-डूबते अचानक उबर जाती है। आज तथास्तु में ऐसी ही एक कंपनी…औरऔर भी

वैसे तो शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग 10,000 रुपए से भी शुरू की जा सकती है। लेकिन ट्रेडिंग से प्रतिमाह 50,000 रुपए कमाना चाहते हैं तो कम से कम 5 लाख रुपए की पूंजी होनी चाहिए। प्रतिमाह 10% नियमित कमाना कोई मामूली बात नहीं। आप सचमुच ट्रेडिंग के उस्ताद बन गए हैं, तभी इतना कमाने की उम्मीद पाल सकते हैं। हालांकि शेखचिल्ली तो महीने भर में दुगुना-तिगुना कमाने का भी मंसूबा पाल सकते हैं। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

ट्रेडिंग सिस्टम में तेज़ी-मंदी दोनों से पार पाने की क्षमता होनी चाहिए। मतलब, आपको शॉर्ट सेलिंग भी आनी चाहिए। तभी आप बाज़ार से गिरने के दौर में कमा सकते हैं। शॉर्ट सेलिंग केवल फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस सेगमेंट में की जा सकती है। चूंकि कम पूंजी है तो आपके पास ऑप्शंस को ही आजमाने का विकल्प बचता है। लेकिन ट्रेडिंग किसी सेगमेंट में करें, हर हाल में आपको अपनी ट्रेडिंग पूंजी बचाकर चलना होगा। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

काम का ट्रेडिंग सिस्टम आपके अनुरूप होने के साथ-साथ सरल होना चाहिए। लेकिन उसमें बाजार की जटिलताओं को पकड़ने का दमखम होना ज़रूरी है। दरअसल, जटिलताओं को हम जितना सुलझा लेते है, सिस्टम उतना ही आसान या सरल होता चला जाता हैं। जटिल सिस्टम किसी को भरमाने के काम आ सकता है, ट्रेडिंग से कमाने में नहीं। उस सिस्टम में तेज़ी और मंदी दोनों के बाज़ार से पार पाने की क्षमता होनी चाहिए। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी