बाज़ार में दिलचस्पी रखनेवाला अदना-सा शख्स भी पूछता फिरता है कि बाज़ार अभी किधर जाएगा, बिना यह जाने-समझे कि बाज़ार है क्या! सेंसेक्स या निफ्टी की चाल को ही बाज़ार माना जाता है। अब चूंकि सेंसेक्स की सभी 30 कंपनियों निफ्टी-50 में शामिल हैं, इसलिए अपडेट रहनेवाले समझदार लोग निफ्टी की दशा-दिशा को ही बाज़ार का परिचायक मानने लगे हैं। लेकिन उनमें से भी कम लोगों को पता है कि निफ्टी में शामिल 50 स्टॉक्स का वजनऔरऔर भी

ट्रेडिंग के आंगन में कदम रखते ही हर कोई टेक्निकल एनालिसिस की तरफ भागता है, जैसे हर लुटेरा ऱाजनेता बनने के लिए दिल्ली की तरफ भागता है। एकदम नौसिखिया ट्रेडर भी सपोर्ट, रेजिस्टेंस, आरएसआई, एमएसीडी और मूविंग एवरेज की बातें फर्राटे से करता है। लेकिन जो ठीक खुली आंखों से सामने दिख रहा है, उसे ही नहीं देखता। तीन साल पहले चर्चित हुई केरल की युवा अभिनेत्री प्रियाप्रकाश वारियर की तरह भौहें इधर-उधर उठाकर पूछता कि बाज़ारऔरऔर भी

वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग का कौशल हासिल करने के लिए आपको साफ-साफ पता होना चाहिए कि कोई सौदा आप क्यों कर रहे हैं। जब तक आप किसी सौदे को भलीभांति समझेंगे नहीं, तब तक आप में इतना आत्मविश्वास नहीं आ सकता कि आप उस पर मजबूती से अमल करें और दांव चूक जाने से उससे काम का सबक हासिल कर सकें। आपको ट्रेडिंग के लिए ज्ञान व सूचनाओं का अपना पूरा डेटाबेस एकदम चाक-चौबन्द रखना होगा। तभीऔरऔर भी

भारत का जीडीपी बीते वित्त वर्ष 2020-21 में 145.69 लाख करोड़ रुपए से 7.3% घटकर 135.13 लाख करोड़ रुपए पर आ गया। पिछले सौ सालों में हमारी अर्थव्यवस्था पहली बार बढ़ने के बजाय सिकुड़ी है। लेकिन इसी दौरान हमारा शेयर बाज़ार 68% बढ़कर ऐतिहासिक चोटी पर पहुंच गया। बीएसई में लिस्टेड लगभग 3500 कंपनियों का मूल्य या बाज़ार पूंजीकरण इस वक्त भारत के जीडीपी के डेढ़ गुना से ज्यादा 227.20 लाख करोड़ रुपए है। ऐसे में रिजर्वऔरऔर भी

ऊपर-ऊपर दिख रही तेज़ी के बीच शेयर बाज़ार के अंदर ही अंदर अजीब सुस्ती घुस गई है। बाज़ार के बढ़ने का संवेग/मोमेंटम घट गया है। सुबह से शाम तक इंतज़ार करनेवाला इंट्रा-डे ट्रेडर ब्रोकरेज़ व अन्य खर्चों के बाद दुखी होकर घर लौटता है। यहां तक कि ऑप्शन बेचनेवाले धुरंधर फाइनेंसर भी मायूस हो चले हैं। वे कॉल और पुट ऑप्शन के प्रीमियम बड़ा हिसाब-किताब लगाकर तय करते हैं। लेकिन शाम तक दोनों ऑप्शंस के प्रीमियम सिकुड़तेऔरऔर भी

आपने गौर किया होगा कि पिछले कुछ दिनों से शेयर बाजार की सांस जल्दी उखड़ जाती है। खुलता तो है गैप के साथ बढ़कर। लेकिन फिर यह बढ़त संभाल नहीं पाता। दिन भर थोड़ी-बहुत तेजी आती है। निफ्टी ज्यादातर सीमित दायरे में भटकता है। कारोबार की समाप्ति तक इतना बढ़ नहीं पाता कि खुलने पर खरीदनेवाले ट्रेडर को शाम तक इंतज़ार करने का वाजिब रिवॉर्ड मिल सके। इससे भी रिटेल ट्रेडरों का नज़रिया दिन नहीं, घंटों वऔरऔर भी

इधर दो-तीन हफ्ते में ही अपने शेयर बाज़ार में खास बदलाव आया है कि उसकी इंट्रा-डे उछलकूद काफी घट गई है। जहां पहले महीनों तक निफ्टी दिन में 200-250 या 300 अंकों तक के दायरे में ऊपर-नीचे होता था, वहीं अब उसका दायरा 100-120 या 130 अंकों तक सिमट गया है। पिछले हफ्ते शुक्रवार को तो उसका दायरा महज 70 अंकों का रहा था। यह बाज़ार में व्यग्रता का कम होना नही, बल्कि बढ़ना दिखाता है। ट्रेडरोंऔरऔर भी

नौसिखिया ट्रेडरों/निवेशकों को किनारे रख दें तो शेयर बाज़ार का सेंटीमेंट फिलहाल दो चीजों से निर्धारित हो रहा है, कंपनियों के सालाना नतीजे और बाहर से आ रहा सस्ते धन का प्रवाह। कंपनियों ने कोरोना व लॉकडाउन से घिरे बीते वित्त वर्ष में अमूमन 25-30% कम कर्मचारियों से काम चलाया तो इसी अनुपात में उनका शुद्ध लाभ बढ़ गया। बाज़ार कितने लोगों की नौकरियां गईं, इसकी नहीं, मुनाफा कितना बढ़ा, इसकी परवाह करता है तो कंपनियों केऔरऔर भी

इस समय हमारा शेयर बाजार रिटेल निवेशकों के हाथ में है। इनमें से अधिकांश 18 से 35 साल के नौजवान हैं। वे बाज़ार में तुरत-फुरत फायदा कमाने के लिए उतरे हैं। किसी फंडामेंटल या टेक्निकल एनालिसिस, देश-विदेश की राजनीति या धन के वैश्विक प्रवाह नहीं, बल्कि इधर-उधर की टिप्स या इन्ट्यूशन के आधार पर खरीदते-बेचते हैं। फिर थोड़ा-सा मुनाफा काटकर निकल जाते हैं। इन पतंगों का शिकार करने के लिए बहुतेरी छिपकलियां बाहर निकल आई हैं। दिक्कतऔरऔर भी

देश में 30 अप्रैल 2021 तक शेयर बाज़ार में निवेश के लिए ज़रूरी 5.69 करोड़ डीमैट एकाउंट खुल चुके हैं। इनमें से करीब 1.40 करोड़ एकाउंट बीते वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान खुले, जब देश कोरोना की पहली लहर की चपेट में था। जब सब कुछ सामान्य था, तब पिछले वित्त वर्ष 2019-20 में लगभग 49 लाख और उससे पहले 2018-19 में करीब 40 लाख डीमैट एकाउंट ही खुले थे। आर्थिक सुस्ती व लॉकडाउन के दौरान डीमैटऔरऔर भी