सतह की गहराई
सागर की अतल गहराई नापी जा सकती है। लेकिन सतह पर बैठे हुए खुलती परतों की गहराई नापना बेहद मुश्किल है क्योंकि हर परत एक नई दुनिया खोल देती है, पुरानी ही दुनिया को नए मायने दे देती है और आप अनंत गहराइयों में उतरते चले जाते हैं।और भीऔर भी
अक्षय पात्र
ज्ञान तो विशाल सागर नहीं, अक्षय पात्र है। पुराना निकालो, नया बनता जाता है। कभी शेष नहीं होता। जब तक जीवन है, तब तक मन खदबद करता रहता है और ज्ञान का नया सत्व निकलता रहता है।और भीऔर भी
दौड़ती है जिंदगी
हर काम हर पल दुनिया में कहीं न कहीं होता रहता है। जीना-मरना, हंसना-रोना, मिलना-बिछुड़ना। अंतहीन छोरों से बंधी डोर उठती है, गिरती है। झूले या सांप नहीं, सागर की लहरों की तरह दौड़ती है जिंदगी।और भीऔर भी
लहराता सागर
अक्सर जिन्हें हम जानते हैं, उन्हें ही पूरी दुनिया समझ बैठते हैं। उनकी नकारात्मक प्रतिक्रिया से टूट जाते हैं। नहीं जानते कि जो लहर हमारे अंदर उठी है उसका स्रोत तो हमारे दायरे के बाहर का सागर है।और भीऔर भी


