सुनता है कौन!
यहां हर कोई अपने में मस्त है। सबकी अपनी दुनिया, अपना संसार है। उन्हें सुनाना है तो पहले आपको किसी न किसी रूप में सत्ता हासिल करनी पड़ेगी। जब ये सत्ता दिखती है तभी दूसरे आपको सुनते हैं।और भीऔर भी
यहां हर कोई अपने में मस्त है। सबकी अपनी दुनिया, अपना संसार है। उन्हें सुनाना है तो पहले आपको किसी न किसी रूप में सत्ता हासिल करनी पड़ेगी। जब ये सत्ता दिखती है तभी दूसरे आपको सुनते हैं।और भीऔर भी
अमेरिका के ऋण-संकट ने पूरी दुनिया के बाजारों की हालत पटरा कर दी है तो भारतीय बाजार कैसे सलामत बच सकता था। निफ्टी एक फीसदी से ज्यादा गिरकर 5500 के नीचे पहुंच गया। फिर भी मुझे लगता है कि अपने यहां असली तकलीफ रोल्स की है। चूंकि यह फिजिकल सेटलमेंट है नहीं, तो ट्रेडरों के पास कैश का अंतर भरने के अलावा कोई चारा नहीं है। यह हमारे बाजार में आई तीखी गिरावट का मूल कारण हैऔरऔर भी
हर बिंदु पर भ्रम है, अनिर्णय है, द्वंद्व है। भगवान या संत के नाम पर इन्हें सुलझाने का भ्रम पैदा किया जाता है। लेकिन जो लोग वाकई इन्हें सुलझाने में सिद्ध हो जाते हैं, सत्ता उनकी चेरी बन जाती है।और भीऔर भी
जिस समाज में जितनी ज्यादा असुरक्षा होती है, वहां सत्ता की उतनी ही भूख और संतों का उतना ही निरादर होता है। लोग सत्ता के पीछे भागते हैं। संत तक संतई छोड़ सत्ता की जोड़-तोड़ में लग जाते हैं।और भीऔर भी
व्यक्ति की नैतिकता हो सकती है। लेकिन सरकारों की कोई नैतिकता नहीं होती। सत्ता की चंडाल चौकड़ी को बचाना ही उसका चरित्र है। हां, वह अवाम की निगाह में जरूर नैतिक दिखना चाहती है।और भीऔर भी
कुर्सी पकड़ते ही कुर्सी आपको जकड़ लेती है। उससे निकली लौह-लताएं आपको लपेट लेती हैं। आप इंसान से सत्ता के पुर्जे बन जाते हो और आपकी चमडी सीमेंट जैसी सख्त व संवेदनहीन हो जाती है।और भीऔर भी
अलग-थलग कोने में बैठकर ज्ञान बघारना, जुमले उछालना और फतवे फेंकना बड़ा आसान है। लेकिन सत्ता, शोहरत व समृद्धि की जंग में पहुंचते ही ऐसे लोग लहूलुहान चूजों की तरह भाग खड़े होते हैं।और भीऔर भी
सही समझ के लिए सत्ता से दो हाथ की दूरी जरूरी है। सत्ता आपकी आंखों पर परदा डाल देती है। ऐसा मतिअंध बना देती है कि आपको बस अपना ही अपना दिखता है, बदलता सच नहीं दिखता।और भीऔर भी
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