बढ़ती मुद्रास्फीति ने आखिरकार रिजर्व बैंक को बेचैन कर ही दिया और उसने आज, शुक्रवार को ब्याज दरें बढ़ाकर मांग को घटाने का उपाय कर डाला। रिजर्व बैंक ने तत्काल प्रभाव से रेपो दर (रिजर्व बैंक से सरकारी प्रतिभूतियों के एवज में रकम उधार लेने की ब्याज दर) 5.25 फीसदी से बढ़ाकर 5.50 फीसदी और रिवर्स रेपो दर (रिजर्व बैंक के पास धन जमा कराने पर बैंकों को मिलनेवाली ब्याज दर) 3.75 फीसदी से बढ़ाकर 4 फीसदीऔरऔर भी

सरकार के लिए बड़े सुकून की बात है खाद्य पदार्थों की मुद्रास्फीति 19 जून को खत्म सप्ताह में तेजी से घटकर 12.92 फीसदी पर आ गई है। इससे पिछले हफ्ते में यह 16.90 फीसदी थी। इस कमी की वजह अनाज और सब्जियों के थोक मूल्यों का घटना है। एक साल पहले की तुलना में आलू के दाम 39.61 फीसदी और प्याज के दाम 7.36 फीसदी घटे हैं। दालों के थोक भाव सालाना आधार पर 31.57 फीसदी ज्यादाऔरऔर भी

मई महीने में थोक मूल्य पर आधारित मुद्रास्फीति की दर भले ही 10.16 फीसदी हो गई हो। खाद्य पदार्थों की मुद्रास्फीति 5 जून को बीते हफ्ते में 16.74 फीसदी से थोड़ा घटने के बावजूद भले ही 16.12 फीसदी पर हो। लेकिन मुद्रास्फीति के इस तरह दहाई अंकों में रहने की स्थिति को रिजर्व बैंक बहुत चौंकानेवाली बात नहीं मानता है। रिजर्व बैंक के डिप्टी गर्वनर के सी चक्रबर्ती ने गुरुवार को मुंबई में आयोजित एक समारोह मेंऔरऔर भी

ग्रीस का संकट हमारे नीति-नियामकों को भी परेशान किए हुए है, लेकिन सभी एक स्वर से कहने में लगे हैं कि इसका भारत पर कोई असर नहीं पड़ेगा। पहले यह बात वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी और वित्त सचिव अशोक चावला बोल चुके हैं। अब रिजर्व बैंक के गर्वरन डी सुब्बाराव ने भी कह दिया है कि ग्रीस संकट के चलते भारत के बाह्य क्षेत्र के सामने कोई समस्या नहीं आएगी। सुब्बाराव मंगलवार को पुणे में रिजर्व बैंकऔरऔर भी

सरकार द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक खाद्य पदार्थों की मुद्रास्फीति दर 15 मई को खत्म हफ्ते में 16.23 फीसदी रही है। इससे ठीक पहले के हफ्ते में यह 16. 49 फीसदी थी। इस गिरावट की मुख्य वजह मसूर, फल व सब्जियों के थोक भाव में आई कमी है। जहां मसूर के भाव में 4 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई, वहीं फल व सब्जियों के भाव में 2 फीसदी और अनाज व दाल की कीमत मेंऔरऔर भी

भारत, चीन, ब्राजील और रूस के आर्थिक विकास की संभावनाएं अगले साल तक और भी बेहतर हो जाएंगी। यह आकलन है दुनिया के जानेमाने संगठन ओईसीडी (ऑर्गेनाइजेशन फॉर इकनोमिक को-ऑपरेशन एंड डेवलपमेंट) का। ओईसीडी ने बुधवार को जारी अपने ताजा अनुमान में कहा है कि भारत में कृषि उत्पादन में बढ़ोतरी की संभावना है। इससे भारत के आर्थिक विकास को आवेग मिलेगा। हालांकि बढ़ती मांग के बीच मुद्रास्फीति का दबाव बना रह सकता है। बता दें किऔरऔर भी

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने वादा किया है कि अगर 2 जी स्पेक्ट्रम की नीलामी में किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार साबित हुआ तो संबंधित शख्स के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। प्रधानमंत्री ने यह वादा तब किया जब उनसे पूछा गया कि वे दूरसंचार मंत्री ए राजा के खिलाफ 2008 में लाइसेंसों की बिक्री में भ्रष्टाचार के आरोपों पर क्या करने जा रहे हैं। प्रधानमंत्री सोमवार को नई यूपीए सरकार के एक साल पूरा करने पर आयोजित संवाददाताऔरऔर भी

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल 2010 में थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति की दर 9.59 फीसदी दर्ज की गई है, जबकि ठीक इसके पहले मार्च 2010 में यह 9.90 फीसदी थी। साल भर पहले अप्रैल 2009 में मुद्रास्फीति की दर केवल 1.31 फीसदी थी। अप्रैल में मुद्रास्फीति की दर में आई कमी की खास वजह फलों, प्याज, गेहूं और अन्य अनाजों के थोक भावों का घटना है। जैसे, आलू के भावऔरऔर भी

मुद्रास्फीति की दर में गिरावट का सिलसिला शुरू हो गया है। खाद्य पदार्थों की मुद्रास्फीति 24 अप्रैल को खत्म हफ्ते में 16.04 फीसदी रही है, जो इसके ठीक पहले 16 अप्रैल के हफ्ते में 16.61 फीसदी थी। इस बीच केंद्र सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार कौशिक बसु ने अनुमान जताया है कि थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति की दर अगले तीन महीनों में घटकर 6-7 फीसदी पर आ सकती है और फिलहाल विदेश से आनेवाली पूंजीऔरऔर भी

किसी भी पैमाने से देखें तो देश में अभी चल रही मुद्रास्फीति की दर काफी ज्यादा है। यह चिंता की बात है क्योंकि इससे एक नहीं, कई तरह की दिक्कतें पैदा होती हैं। खासकर आबादी के बड़े हिस्से के लिए जिसके पास इसके असर को काटने के लिए कोई उपाय नहीं है। पहली बात कि मुद्रास्फीति आपके पास जो धन है, उसकी क्रय क्षमता को कम कर देती है। इससे बंधी-बंधाई आय और पेंशनभोगी लोगों का जीवनऔरऔर भी