नए की पीड़ा
सृजन व पीड़ा में अभिन्न रिश्ता है। प्रकृति ने तो सृजन की हर प्रक्रिया के साथ खुशी व उन्माद के ऐसे भाव जोड़ रखे हैं कि पीड़ा गौड़ हो जाती है। सामाजिक सृजन में इंसान को यह काम खुद करना पड़ता है।और भीऔर भी
सृजन व पीड़ा में अभिन्न रिश्ता है। प्रकृति ने तो सृजन की हर प्रक्रिया के साथ खुशी व उन्माद के ऐसे भाव जोड़ रखे हैं कि पीड़ा गौड़ हो जाती है। सामाजिक सृजन में इंसान को यह काम खुद करना पड़ता है।और भीऔर भी
नितांत आत्मीय रिश्ते ही भावना-प्रधान होते हैं। बाकी सभी मित्र और नाते-रिश्तेदार काम खत्म, पैसा हज़म का नाता रखते हैं। उनसे इससे ज्यादा अपेक्षा भी नहीं करनी चाहिए क्योंकि हम भी तो यही करते हैं।और भीऔर भी
हमें दूर का सब दिखता है। जो नहीं दिखता, उसे भी देखने का सरंजाम कर लेते हैं हम। लेकिन पास की चीजें नहीं देख पाते हम, जबकि समाधान आसपास ही मौजूद है जिसके लिए दूर जाने की जरूरत नहीं।और भीऔर भी
विकास कभी रैखिक नहीं होता। वह छल्लों में चलता है। हर छल्ला पहले से ऊपर, पहले से बड़ा होता है। लेकिन पुराने छल्ले के ऊपर वह इस तरह चढ़ा रहता है कि अक्सर हमें ठहराव का भ्रम हो जाता है।और भीऔर भी
होलिका व प्रह्लाद तो बहाना हैं। मकसद है हर साल नियम से तन, मन, रिश्तों व धरती में जमा कंकास को जलाकर खाक करना, उल्लास मनाना। अभी तो कंकास इतना है कि हर तिमाही होली की जरूरत है।और भीऔर भी
चीजों को कायदे से देखने-समझने के लिए उनसे ऊपर उठना जरूरी है। मगर धरती पर रहते हुए उससे ऊपर कैसे उठें? संसार में रहते हुए उससे निर्लिप्त कैसे हों? वैसे ही जैसे दही को मथो और मक्खन ऊपर।और भीऔर भी
वही खाना, वही सोना, वही जागना, वही नहाना, वही धोना। यह क्रम है जिसे हर दिन निभाना रहता है। घर की सफाई हर दिन करनी पड़ती है। इसी तरह ज्ञान के लिए एक दिन नहीं, हर दिन पढ़ना पड़ता है।और भीऔर भी
यहां हर चीज का अपना स्वतंत्र चक्र है। तन का भी और उससे जुड़े मन का भी। खुद को दूसरे के हवाले करते ही चक्र उसकी शर्तों पर ढल जाता है। पर मुक्ति अपने चक्र के अपनी शर्तों पर चलने से मिलती है।और भीऔर भी
दुनिया जंगल है और उसकी सारी राहें पत्तों से ढंकी हैं। बड़े होते ही मां-बाप का हाथ छोड़ राह की तलाश में जुट जाते हैं। सच्चा गुरु मिला तो मिल जाती है मंजिल। नहीं तो ताज़िंदगी भटकते रह जाते है।और भीऔर भी
© 2010-2025 Arthkaam ... {Disclaimer} ... क्योंकि जानकारी ही पैसा है! ... Spreading Financial Freedom