प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीईए) ने मंगलवार को अपनी बैठक में दो प्रमुख सरकारी खनन कंपनियों कोल इंडिया और हिंदुस्तान कॉपर के विनिवेश को हरी झंडी दे दी। लेकिन तय हुआ है कि कोल इंडिया में कोई नए शेयर नहीं जारी किए जाएंगे और सरकार की 10 फीसदी हिस्सेदारी ही बेची जाएगी, जबकि हिंदुस्तान कॉपर में 10 फीसदी सरकारी इक्विटी बेचे जाने के साथ-साथ 10 फीसदी नए शेयर जारी किएऔरऔर भी

केंद्रीय कैबिनेट ने कोल इंडिया और हिंदुस्तान कॉपर के विनिवेश का फैसला टाल लिया है। इसकी मुख्य वजह राजनीतिक सहमति न बन पाना बताया जा रहा है। खासकर, रेल मंत्री ममता बनर्जी कोल इंडिया के विनिवेश का विरोध कर रही हैं। गुरुवार को कैबिनेट की बैठक के बाद खान मंत्री बी के हांडिक ने मीडिया को यह जानकारी दी। लेकिन उन्होंने विनिवेश का फैसला टालने की कोई वजह अपनी तरफ से नहीं बताई। बता दें कि जहांऔरऔर भी

केंद्र सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की चार कंपनियों – एनटीपीसी, स्टील अथॉरिटी (सेल), इंडियन ऑयल और ओएनजीसी को महारत्न का ओहदा दे दिया है। महारत्न का दर्जा सरकार की उन लिस्टेड कंपनियों को दिया जाता है जिनका औसत सालाना टर्नओवर पिछले तीन सालों के दौरान 25,000 करोड़, शुद्ध लाभ 5000 करोड़ और नेटवर्थ (इक्विटी + फ्री रिजर्व) 25,000 करोड़ रुपए से ज्यादा हो। बता दें कि केंद्र सरकार मार्च 2011 से पहले सावर्जनिक क्षेत्र की कई कंपनियोंऔरऔर भी