चीज हमारी आंखों के सामने रहती है, पहुंच में रहती है, फिर भी नहीं दिखती क्योंकि हमें उसके होने का भान ही नहीं होता। भान होता भी है तो उसे गलत जगह खोजते रहते हैं। कस्तूरी कुंडलि बसय, मृग ढूंढय बन मांहि।और भीऔर भी

अक्सर हम ढूंढ कुछ रहे होते हैं और हमें मिल कुछ और जाता है। असल में लगातार चल रही इस दुनिया में कुछ लोगों, कुछ चीजों को हमारी भी तलाश रहती है। हमने उसे खोजा या उसने हमको, इससे फर्क नहीं पड़ता।और भीऔर भी

मंत्र-तंत्र हमारी अंदर की शक्तियों को जाग्रत करने के लिए होते हैं। बाहर की अनंत शक्तियों के साथ सही मेल बैठते ही काम हो जाता है। लड़ना हमें ही पड़ता है। बाहर की शक्तियां तो बस माहौल बनाती हैं।और भीऔर भी