समय और अनिश्चितता, दो ऐसी चीजें हैं जिनसे हर इंसान का साबका सड़क पार करने से लेकर भावी योजना और निवेश तक के तमाम छोटे-बड़े फैसलों तक में पड़ता है। जिस किसी ने भी इन्हें साध लिया, उसकी ज़िंदगी आसान हो जाती है।और भीऔर भी

जिंदगी में अनिश्चितता है तो बदलाव भी शाश्वत है। फिर भी हम निरंतर निश्चितता व स्थायित्व की तलाश में लगे रहते हैं। हमारी चाहत व हकीकत के बीच संघर्ष निरंतर चलता है। तभी एक दिन हम निश्चित मृत्यु तक पहुंचकर मिट जाते हैं।और भीऔर भी

छोटी-छेटी प्रतिक्रियाओं में हम अक्सर बड़े फैसले कर बैठते हैं। राजनीति और ज़िंदगी दोनों में। भूल जाते हैं कि हमारे इन फैसलों से रिश्ते सन्न रह जाते हैं, भावनाएं तड़क जाती हैं। प्रतिक्रिया से हमें सब मिल जाता है, पर उनकी तो ज़िदगी ही उजड़ जाती है।और भीऔर भी

धन से टेक्नोलॉजी खरीदी जा सकती है, ज्ञान भी खरीदा जा सकता है। लेकिन अच्छे लोग नहीं। अच्छे लोग किसी भी संगठन के लिए धरोधर होते हैं, जबकि बुरे लोग बोझ। अगर कहीं अच्छे लोगों की कद्र नहीं है तो समझ लीजिए कि वह संगठन लंबा नहीं चलेगा।और भीऔर भी

हम जीते-जी इंसान में भगवान तलाशते रहते हैं। खूबियां छोड़ उसकी खामियां निकालते हैं। पर मरते ही महिमामंडित करके भगवान बना देते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि वायवी व मायावी भगवान के आगे हमें छोटा बनना मंजूर है, असली इंसान के आगे नहीं।और भीऔर भी

सपनों का मर जाना खतरनाक है, लेकिन उससे भी ज्यादा खतरनाक होता है सवालों का मर जाना। जिस पल से हम सवाल उठाना बंद कर देते हैं, उसी पल से हम यथास्थिति को गले लगा लेते हैं जिससे ज्ञान से लेकर सपनों तक का स्रोत बंद हो जाता है।और भीऔर भी

विश्वास के बिना दुनिया नहीं चलती, लेकिन अंधविश्वास हमें अंधेरी खाईं में धकेल देता है। संशय के बिना जीवन में नया कुछ जानना मुमकिन नहीं, लेकिन संशयात्मा बनते ही जीवन थम जाता है। वही रसायन दवा होता है और एक सीमा के बाद ज़हर।  और भीऔर भी

सुखी वही है जिसकी दृष्टि सम्यक है, जो स्थिरता के साथ गति को भी देखता है, जो वर्तमान के साथ-साथ उसके भीतर पनपते भविष्य को समझने का माद्दा रखता है, जो अतीत के मोह में चिपक कर वर्तमान व भविष्य के प्रति शंकालु नहीं रहता।और भीऔर भी

जो लोग सच को सूत्रों में फिट करते हैं, वर्तमान को पूरी जटिलता के साथ समझे बगैर ही बदलने की बात करते हैं, वे कोरे लफ्फाज़ हैं, क्रांतिकारी नहीं। वे समाज की चक्रवाती भंवर से निकले झाग हैं। उनसे किसी सार्थक काम की उम्मीद बेमानी है।और भीऔर भी

हम अपनी समस्याओं को लेकर इतने आक्रांत रहते हैं कि होश ही नहीं रहता कि दूसरे की समस्याएं क्या हैं। अरे बंधु! ध्यान रखें कि इस जहान में समस्याओं से मुक्त कोई नहीं। हां, सबकी समस्याओं की सघनता और स्तर जरूर अलग-अलग है।और भीऔर भी