प्यार की नेमत
वे लोग बड़े बदकिस्मत होते हैं जिनमें प्यार की उदात्त भावना नहीं होती, जो प्यार न ले पाते हैं, न प्यार दे पाते हैं। प्यार तो वो नेमत है जो प्रकृति ने किसी भी दूसरे जीव को नहीं, सिर्फ इंसानों को बख्शी है।और भीऔर भी
जंग अकेले की
प्रकृति से कैसे निपटना है, यह तो हर जीव की तरह हम मां के पेट से सीखकर आते हैं। समाज से निपटने की शुरुआती सीख हमें घर-परिवार, स्कूल व परिवेश से मिलती है। फिर जंग में हम अकेले होते हैं।और भीऔर भी
दो हफ्ते और बचे हैं खरीदने के लिए
निराशावादी चिंतन का कोई अंत नहीं है। निवेश फंडों या ब्रोकरेज हाउसों के सरगना अपने निहित स्वार्थों के चलते बाजार को लेकर जैसी निराशा फैला रहे हैं, उसका भी कोई अंत नहीं है। लेकिन मैं इनकी रत्ती भर भी परवाह नहीं करता क्योंकि मैं कोई ब्रोकिंग के धंधे में तो हूं नहीं। फंड अपने फैसलों को जायज ठहराने की कोशिश करते हैं। कहते हैं कि वे जन-धन का प्रबंधन कर रहे हैं। सच यह है कि फंडऔरऔर भी
मूलतः मौलिक
प्रकृति ने हर इंसान को मौलिक बनाया है। एक ही मां-बाप की संतानों में जीन्स का भिन्न समुच्चय। फिर भी अनुकृतियों से भरा समाज! दोष किसका? थोड़ा हमारा तो बहुत सारा जीने की शर्तों का।और भीऔर भी
सहजता व अनुशासन
वैसे तो सहजता सबसे बड़ा अनुशासन है। लेकिन अनुशासन यूं ही सहज नहीं बनता। शुरू-शुरू में उसे आरोपित करना पड़ता है। बाद में एक दिन वह साइकिल के पैडल चलाने जैसा सहज बन जाता है।और भीऔर भी
मृत्यु का अभ्यास
चलो! आंखें बंदकर अनंत यात्रा पर निकल जाएं। अंदर की प्रकृति को बाहर की प्रकृति से एकाकार हो जाने दें। पेड़ों की फुनगियों, पहाड़ों के छोर को छूते हुए बादलों के फाहों पर उड़ने दें। मृत्यु का अभ्यास करने दें।और भीऔर भी
कोई तो होगा!
हम अलग, तुम अलग। हर जीव अलग, जंतु अलग। पर आकाश वही है, धरती वही है, सारी प्रकृति वही है। अणु वही, परमाणु वही है। फिर, कोई एक नियम भी तो होगा जिससे सारे नियम चलते होंगे!और भीऔर भी
हद की सरहद
जब कभी लगता है कि अब तो हद हो गई, अति हो गई, अब कोई सूरत नहीं बची है, तभी अचानक कोई ऐसी राह निकल आती है जिसके बारे में दूर-दूर तक नहीं सोचा होता है। यह किसी धर्म का नहीं, प्रकृति का नियम है।और भीऔर भी
बढ़ना-ठहरना
ऊंचा उठने की एक सीमा होती है। उसके बाद ठहरकर अगल-बगल बढ़ना होता है। फिर एक से अनेक होकर विस्तार का सिलसिला चलता है। प्रकृति से लेकर विचार व रचना तक यही होता है। समझ लें तो अच्छा है।और भीऔर भी
