केन्द्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने कहा है कि संसदीय समितियों की सिफारिशों को ‘अनिश्चित काल’ तक के लिए देश के नागरिकों की पहुंच से दूर नहीं रखा जा सकता, भले ही उन्हें सदन में पेश नहीं किया गया हो।
मुख्य सूचना आयुक्त सत्यानंद मिश्रा ने राज्यसभा सचिवालय को सूचना के अधिकार पर अमल को लेकर संसदीय स्थायी समिति की सिफारिशों का खुलासा करने का निर्देश देते हुए यह फैसला सुनाया है। इन सिफारिशों को तीन साल बीतने के बावजूद संसद में पेश नहीं किया गया है।
यह मामला पुणे के कार्यकर्ता विहार धुर्वे से जुड़ा है जिन्होंने सचिवालय से समिति की सिफारिशों के बारे में जानकारी मांगी थी लेकिन यह सूचना उन्हें देने से इनकार कर दिया गया। सचिवालय ने कहा, चूंकि समिति की सिफारिशों को संसद के समक्ष पेश नहीं किया गया है, इसलिए पारदर्शिता कानून के तहत इनका खुलासा संसदीय विशेषाधिकारों का उल्लंघन होगा।
