भारतीय शेयर बाजार अब भी इतना विकसित नहीं हुआ है कि उस्तादों के शिकंजे से निकलकर आम निवेशकों व ट्रेडरों के लिए भी बहुत सहज व सामान्य हो जाए। इनके लिए तो अब भी वही पुरानी स्थिति है कि सावधानी हटी, दुर्घटना घटी। कोई भी कहीं भी रिटेल निवेशकों व ट्रेडरों के बीच सर्वे कर ले तो यही नतीजा निकलेगा कि 90-95% निवेशक व ट्रेडर गंवाते हैं, जबकि केवल 5-10% ही कमाते हैं। साथ ही यहां निवेश व ट्रेडिंग के बीच की विभाजन रेखा बड़े आराम से मिट जाया करती है। दिक्कत यह भी है कि रिटेल के जो बंदे 5-10% सफल उस्तादों के नक्शे-कदम पर चलने की कोशिश करते हैं, वे भी अक्सर मुंह की खाते हैं। इस स्थिति से उबरने का एक ही तरीका है जिसे किसी ज़माने में बुद्ध ने कहा था कि अप्प दीपो भव। अपना दीपक खुद बनो। शेयर बाज़ार में निवेश व ट्रेड करना विज्ञान है तो कला भी। लेकिन इसमें नकल नहीं, अकल से काम करना पड़ता है। भेड़चाल से अलग हटकर अपनी राह खुद बनानी पड़ती है। शेयर बाज़ार की अनिश्चितता को स्वीकार कर उसे नाथने की कला विकसित करनी पड़ती है। अब तथास्तु में पेश कर रहे हैं आज की दमदार कंपनी…
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