गंभीर मतभेदों और तीखी बयानबाजी के दौर के बाद सरकार और गांधीवादी अण्णा हज़ारे पक्ष के बीच सोमवार को दिल्ली में हुई लोकपाल विधेयक मसौदा समिति की बैठक ‘सौहार्दपूर्ण’ रही। हालांकि, सरकार ने जहां बातचीत में बड़ी प्रगति होने का दावा किया, वहीं हज़ारे पक्ष ने कहा कि मतभेद वाले मुद्दों पर अभी तक आम सहमति नहीं बन पाई है।
बैठक का ‘सौहार्दपूर्ण’ माहौल में होना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछली बैठक में गंभीर मतभेद उभरने के बाद दोनों पक्षों के बीच बातचीत लगभग टूटने की कगार पर पहुंच चुकी थी।
बहरहाल, सोमवार को करीब तीन घंटे चली बैठक के बाद मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘हमारे बीच बिना किसी कटुता के विस्तृत चर्चा हुई। इस बैठक को हम प्रस्तावित लोकपाल विधेयक की दिशा में उठाया गया बड़ा कदम मानते हैं। बातचीत में बड़ी प्रगति हुई है। प्रस्तावित मसौदा विधेयक के लगभग 80 से 85 फीसदी प्रावधानों को अंतिम रूप दिया जा चुका है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘कई मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच व्यापक तालमेल है। जिन पर मतभेद हैं, उनका मसौदे में जिक्र किया जाएगा। मसौदा समिति की कल (मंगलवार को) भी बैठक होगी जिसमें दोनों पक्ष मसौदे के अपने-अपने संस्करण एक-दूसरे को सौंपेंगे।’’
सिब्बल के दावे के विपरीत हज़ारे पक्ष के अरविंद केजरीवाल और प्रशांत भूषण ने कहा, ‘‘जिन मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच पहले मतभेद थे, उन पर अब तक भी कोई सहमति नहीं बन पाई है। प्रस्तावित लोकपाल की चयन प्रक्रिया और उसे हटाने की प्रक्रिया जैसे दो नए मुद्दों पर हमारे सरकार के साथ मतभेद उभरे हैं।’’ हालांकि, दोनों ने कहा कि आज की बैठक पूर्व की बैठकों की तुलना में ‘सौहार्दपूर्ण’ रही।
