दिक्कत यह है कि आम भारतीय जिस एलआईसी को गाढ़े-वक्त का साथी मानते हैं, उसे हमारी सरकार ने अपना एटीएम बना रखा है। जहां कहीं निवेश करना हो, वह एलआईसी की गाढ़ी निधि का सहारा लेने लगी है। यहां तक कि सरकारी कपंनियों के शेयर बेचने या विनिवेश के कार्यक्रम में कोई नहीं मिला तो सारी बिक्री एलआईसी के मत्थे मढ़ दी जाती है और एलआईसी को मजबूरन उनका दाम चुकाना पड़ता है। अब शुक्रवार का अभ्यास…
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