राष्ट्रवादी सरकार वही है तो देश के प्राकृतिक व मानव संसाधनों का अधिकतम न हो सके तो अभीष्टतम विकास करे। मैक्सिमम नहीं तो ऑप्टिमम। यही देश को आत्मनिर्भर बनाने का भी असली सूत्र है। बाकी सब फालतू बातें और खोखले नारे हैं। मोदी सरकार के राष्ट्रवादी होने के दावे को इसी आधार पर परखा जाना चाहिए। मानव संसाधनों पर यह सरकार 12 सालों में पूरी तरह एक्सपोज़ हो चुकी है। अभी प्राकृतिक संसंधानों पर उसको परखा जाना बाकी है। इसका एक अहम माध्यम बन सकते हैं धरती के दुर्लभ खनिज, जिनको लेकर आज दुनिया भर में मारामारी मची हुई है और जिनके दम पर चीन ने अमेरिका के सनकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प तक को झुकने पर मजबूर कर दिया। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी के मुताबिक इस समय दुनिया की तकरीबन 60% रेअर अर्थ माइनिंग चीन के पास है और इसकी 91% प्रोसेसिंग क्षमता भी वो रखता है। भारत के पास दुनिया में रेअर अर्थ खनिजों का तीसरा सबसे बड़ा भंडार है। फिर भी हम इन खनिजों के उत्पादन में 1% से भी कम योगदान कर रहे हैं। यही नहीं, हम इन खनिजों की ज़रूरत का 45% से ज्यादा हिस्सा चीन से आयात करते हैं। इस विसंगति को दूर करने के लिए इस बार के बजट में ओडिशा, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश व केरल में समपित रेअर अर्थ कॉरिडोर बनाने की बात कही गई है। पूरा सच क्या है? अब सोमवार का व्योम…
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