दलाल स्ट्रीट और हार्निमन सर्कल का वो बरगद

आज बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) और दलाल स्ट्रीट पर्यायवाची हो गए हैं। यहां तक कि पूरे भारतीय शेयर बाजार को अमेरिका के वॉल स्ट्रीट की तर्ज पर दलाल स्ट्रीट कहा जाता है। देश के इस सबसे पुराने स्टॉक एक्सचेंज का जन्म 1875 में एक एसोसिएशन के रूप में हुआ था, जिसका नाम था – नेटिव शेयर एंड स्टॉक ब्रोकर एसोसिएशन। लेकिन इसका बीज 1840 में एक बरगद के पेड़ के नीचे पड़ा था।

मुंबई के चर्चगेट इलाके में फिलहाल जहां हार्निमन सर्कल है, वहां टाउनहाल के पास बरगद के पेड़ के नीचे दलाल लोग इकट्ठा होते थे और शेयरों का सौदा करते थे। एक दशक के बाद ये दलाल मेडोज स्ट्रीट और महात्मा गांधी रोड के जंक्शन पर बरगद के पेड़ की घनी छाया के नीचे जुटने लगे। शेयर दलालों की संख्या बढने पर उन्हें नई जगह पर जाना पड़ता था। यह सिलसिला जारी रहा और अंत में 1874 में उन्हें एक स्थाई जगह मिल गई। बाद में यह जगह दलाल स्ट्रीट के रूप में सुविख्यात हो गई। फिर साल भर बाद ही इन दलालों ने अपना एसोसिएशन बना डाला।

भारत उस दौरान ब्रिटिश शासन के अधीन था। 18 जनवरी 1899 के दिन ब्रिटिश उच्चाधिकारी जे एम मेक्लिन द्वारा मुंबई के इन स्थानीय शेयर दलालों के बारे में कहा कि, “ये लोग समाज के अभिन्न अंग हैं जिनको उचित सम्मान नहीं मिला, बल्कि उनके दोषों को ही देखा जाता है। बिना किसी अपवाद के ये शेयर दलाल विश्वसनीय रहे हैं। उनको भले ही कितना भी नुकसान झेलना पडा हो, लेकिन उन्होंने अपने ग्राहकों की पाई-पाई चुकाई है।” अंग्रेज अधिकारी की तारीफ के बाद तो सिलसिला बढ़ता ही गया। शेयर बाजार मुंबई पोर्ट ट्रस्ट और मुंबई म्युनिसिपलिटी जैसी संस्थाओं को नीचे से ऊपर उठाने में सहायक रहा है। इस समय मुंबई जिस रूप में है, उसे बनाने में इन देशी शेयर दलालों की उल्लेखनीय भूमिका रही है।

देश से बाहर निकल कर देखें तो माना जाता है कि दुनिया के पहले शेयर बाजार का जन्म बेल्जियम में हुआ था। बेल्जियम के एंटवर्प शहर में 1531 में बाजार के मुख्य विस्तार के लिए कई व्यापारी इकट्ठा हुए थे। वे शेयर और कमोडिटीज में सट्टा करते थे। विश्र्व का पहला संगठित स्टॉक एक्सचेंज वर्ष 1602 में हॉलैंड के शहर एमस्टर्डम में स्थापित हुआ। 18वीं सदी के अंत में न्यूयार्क स्टॉक एक्सचेंज अस्तित्व में आया, जो आज विश्र्व के शक्तिशाली एक्सचेंजों में गिना जाता है। भारत में उस दौरान हुंडी और बिल ऑफ एक्सचेंजों की खरीद-बिक्री व्यापारी वर्ग की सामान्य प्रवृत्ति मानी जाती थी।

भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी के शासन के दौरान 1850 में कंपनीज एक्ट, 1850 पारित किया और शेयर ट्रेडिंग का एक नया रास्ता खुल गया। हालांकि उसके पहले भी शेयरों का सौदा होता था, लेकिन नाममात्र के लिए। ट्रेडिंग के लिए बड़ी संख्या में शेयर उपलब्ध हुए बिना इस प्रवृत्ति को गति मिलना संभव नहीं था। उन दिनों कमर्शियल बैंक, चार्टर्ड बैंक, ओरिएंटल बैंक और बैंक ऑफ बॉम्बे जैसे मुख्य बैंक स्टॉक जैसे कुछ शेयर ही उपलब्ध होते थे। लोगों में भी शेयर में निवेश करने के प्रति बहुत झुकाव नहीं था। शेयर ट्रेडिंग की मात्रा भी कम रहती थी। तब सिर्फ छह शेयर दलाल हुआ करते थे। उस समय न तो ट्रेडिंग हॉल था, न ही शेयर बाजार की इमारत। इसके लिए आवश्यक पूंजी भी नहीं थी। बावजूद इसके 1860 तक शेयर दलालों की संख्या 60 तक पहुंच गई थी।

1860 में एक ऐसे शख्स सामने आए जिन्होंने ‘शेयर मैनिया’ को जन्म दिया। इनका नाम था प्रेमचंद रायचंद। ये पहले भारतीय शेयर दलाल थे जो अंग्रेजी पढ़-लिख सकते थे। प्रेमचंद रायचंद ने मुंबई में कई लैंड रिक्लमेशन सहित अनेक कंपनियों को खड़ा करने में सहायता की थी। शेयरों के सौदों की प्रवृत्ति बढ़ती गई और धीरे-धीरे शेयर दलालों की संख्या भी बढ़कर 200 से 250 तक पहुंच गई।

इसके बाद 1865 में अमेरिकन सिविल वॉर या गृह-युद्ध का अंत होने के बाद भारत में आनेवाली पूंजी के प्रवाह में कमी आ गई और ‘शेयर मैनिया’ का भी अंत हो गया। रातोंरात शेयरों के भाव नाटकीय ढंग से नीचे गिर गए। परिणाम स्वरूप शेयर दलालों का कामकाज ठप हो गया। इसकी वजह से शेयर दलालों के एसोसिएशन की रचना का विचार उनके मन में आया। फिर शेयर दलालों ने एकजुट होकर 1868 और 1873 के बीच एक अनौपचारिक एसोसिएशन की रचना की। 1974 में इन दलालों ने नियमित सौदा करने के लिए एक जगह खोज ली जो अब दलाल स्ट्रीट के नाम से प्रसिद्ध है।

9 जुलाई 1875 को शेयर दलालों ने इस एसोसिएशन को औपचारिक स्वरूप दिया और ‘दि नेटिव एंड स्टॉक ब्रोकर्स एसोसिएशन’ का जन्म हुआ। इस तरह मात्र 318 व्यक्तियों ने 1 रुपए के प्रवेश शुल्क के साथ शेयर बाजार, मुंबई की संस्था गठित की। इन्होंने एक प्रस्ताव पारित किया जिसमें नेटिव शेयर एंड स्टॉक ब्रोकरों के हित, दर्जा व स्वरूप की रक्षा के वास्ते एसोसिएशन के सदस्यों के उपयोग के लिए एक हॉल अथवा इमारत का निर्माण करना निश्चित हुआ। 1887 तक इस निर्णय पर अमल नहीं किया जा सका। लेकिन एक ट्रस्ट डीड जरूर बनी और 1887 में इस ट्रस्ट डीड में लिखे गए शब्द वर्तमान मुंबई शेयर बाजार की नींव के पत्थर बन गए। यह है कि आज के बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का अतीत। एक वट वृक्ष के नीचे हुई शुरुआत कितना बड़ा आकार ले चुकी है, आज सारी दुनिया इस बात की साक्षी है।

(बीएसई द्वारा प्रस्तुत जानकारियों पर आधारित)

2 Comments

  1. amulya jankari prapt hui . karmshilta ki gati ko sach mai koi nahi janta . kon pahele se jan pata h ki hamare yeh pahal kis unchai par le jaiga . samajh mai aa gaya h karm karte chalo munnabhai …manjil to milegi .

  2. Sir mujhe jati praman ptra and niwas praman ptra bnana hai plz mera help kariye na sir

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