गरीबों के लिए ज्यादा चमके सोना-चांदी!

मध्यवर्ग खर्च चलाने के लिए बैंकों व एनबीएफसी से ऋण लिये जा रहा है। कॉरपोरेट क्षेत्र पूजी निवेश के बजाय कैश बचा रहा है और बैंकों से ऋण लेने से कतरा रहा है। लेकिन देश के उन 81.35 करोड़ गरीबों का क्या जो हर महीने सरकार से मिल रहे पांच किलो मुफ्त राशन पर निर्भर हैं? यह आश्चर्यजनक, किंतु सच है कि भारत के गरीब अमीरों की बनिस्बत ज्यादा धन सोने में लगाकर रखते हैं। सरकार के राष्ट्रीय सांख्यिकी संगठन के एक सर्वे के मुताबिक साल भर में ₹1.79 लाख से कम आय वाले गरीब परिवारों ने अपनी 24% बचत सोने में लगा रखी है, जबकि ₹14.8 लाख से ज्यादा कमानेवाले अमीर परिवारों का केवल 2% धन सोने में लगा है। शेयर बाज़ार व म्यूचुअल फंड जैसे माध्यम आ जाने के बावजूद भारतीय परिवारों के लिए सोना-चांदी निवेश का बड़ा माध्यम है। उन्होंने 2022-23 में सोने-चांदी में ₹63,397 करोड़ लगाए जो एक दशक पहले 2012-13 से 73% ज्यादा था। इसका मतलब यह नहीं कि उनके पास ज्यादा धन आ गया जिससे वे अधिक सोना-चांदी खरीद रहे हैं। असल में उक्त दस सालों में सोने का भाव 95% और चांदी का भाव 21% बढ़ गया। आम भारतीय अब भी भौतिक आस्तियों को तरजीह देते हैं। तभी तो उक्त दस सालों में भौतिक आस्तियों में लगी उनकी बचत ₹1.5 लाख करोड़ से बढ़कर ₹3.5 लाख करोड़ हो गई। अब शुक्रवार का अभ्यास…

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