भारत जैसी युवा आबादी से लबालब भरे देश के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन न जाने क्यों मुद्रास्फीति और बेरोज़गारी को एक निगाह से नहीं देखते। उन्होंने आर्थिक सर्वेक्षण में 2011 से लेकर अब तक की मुद्रास्फीति का सालाना डेटा देकर बताया है कि कैसे मुद्रास्फीति बराबर घटती रही है। लेकिन वो बेरोजगारी का ऐसा कोई डेटा नहीं देते। अगर इन्हीं 15 सालों के दौरान रही बेरोज़गारी का डेटा दे देते तो यह सच उजागर हो जाता कि आज बेरोज़गारी की दर ऐतिहासिक रूप से बहुत ज्यादा चल रही है। वैसे, सरकार ने बेरोज़गारी का डेटा देने की जो पद्धति अपना रखी है, वो अपने-आप में कमाल की है। उसके द्वारा हर महीने पेश किए जा रहे आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) का एक नमूना पेश है जो किसी पहेली से कम नहीं। उससे निकाली गई टाइम सीरीज़ के मुताबिक देश में कोविड महामारी के दौरान 2020-21 में बेरोज़गारी की दर घटकर 4.2% पर आ गई थी, जबकि 2017-18 में यह 6.0%, 2018-19 में 5.8% और 2019-20 में 4.8% रही थी। आखिर यह कैसे संभव है कि जब देश का जीडीपी बढ़ने के बजाय 6.6% घट गया था, लॉकडाउन के चलते लाखों मजदूर सड़कों पर आ गए थे, तब रोज़गार बढ़ गया और बेरोज़गारी घट गई? सरकार और उसके मुख्य आर्थिक सलाहकार ने अभी तक इस चमत्कार का राज़ नहीं खोला है। अब बुधवार की बुद्धि…
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