कंपनियां किसी निर्वात में नहीं काम करतीं। वे जिस उद्योग में काम करती हैं, उसके उतार-चढ़ाव व हालात से प्रभावित होती हैं। जिस देश में काम करती हैं, उसकी नीतियों से प्रभावित होती हैं। घरेलू नीतियों से देश का भीतरी बाज़ार प्रभावित होता है तो व्यापार संधियों से कंपनियों को विदेशी बाज़ार पाने में सहूलियत हो जाती है। भारत ने हाल में यूरोपीय संघ और अमेरिका के अलावा ब्रिटेन, संयुक्त अरब अमीरात, ओमान, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड जैसेऔरऔर भी