व्यक्तियों के हित बन गए हैं राष्ट्रीय हित!
देश की संप्रभुता और राष्ट्रीय हित यकीनन सर्वोपरि है। लेकिन लोकतंत्र में जनता ही संप्रभु है और उसका हित ही राष्ट्रीय हित है। राष्ट्रीय चेतना को झकझोर देनेवाले इस दौर मे समझना ज़रूरी है कि मोदी सरकार राष्ट्रीय हित का नाम लेकर किसका हित साध रही है। सब जानते हैं कि अपने परम मित्र अडाणी को अमेरिका में रिश्वतखोरी के मामले में जेल जाने से बचाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी डोनाल्ड ट्रम्प के खिलाफ खुलकर नहींऔरऔर भी
आज़ादी के 78 साल, भाग्यविधाता कौन!
आज़ादी के 78 साल बाद भारत की यह कैसी हालत और दुर्भाग्य है कि अमेरिका का सनकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प तय रहा है कि हम पेट्रोलियम तेल और हथियार रूस से नहीं, उससे खरीदें। नहीं तो वो हमारे निर्यात पर दुनिया का सबसे ज्यादा 50% टैरिफ लगा देगा। वो भी तब, जब हमारे पास इतनी अपार प्राकृतिक और मानव सम्पदा है। दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी हमारे पास, दुनिया का सबसे बड़ा बाज़ार हमारे पास। फिरऔरऔर भी
अनिश्चितता में कमजोर डूबें, तगड़े नहीं
अनिश्चितता ही शेयर बाज़ार का दुख है, सुख है। थ्रिल और अवसाद में डुबाने का कारण भी। इस समय शेयर बाज़ार पर यही अनिश्चितता छाई है। वो भी छोटी-मोटी नहीं, अपने चरम पर। रूस-यूक्रेन का युद्ध जारी है। शायद 15 अगस्त को पुतिन-ट्रम्प की मुलाकात के बाद थम जाए। मध्य-पूर्व में इस्राइल-ईरान का युद्ध थम गया तो इस्राइल ने सीरिया पर हमला कर दिया। पूरा इलाका अब भी सुलग रहा है। ऊपर से ट्रम्प का सारी दुनियाऔरऔर भी
सनक इनकी या उनकी, मरता तो है देश
सत्ता शीर्ष पर बैठे व्यक्ति की हरकतों से समूचे देश का नुकसान होता है। नंवबर 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसी सनक या साजिश में नोटबंदी लागू की तो देश के जीडीपी को 1.5% से 2% का नुकसान हो गया। हमारी अर्थव्यवस्था की जो विकास दर 8% के करीब जा पहुंची थी, वो नोटबंदी के बाद 6% तक सिमट गई। अब अमेरिका का राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भी अपनी सनक में भारत के आयात पर 50% टैरिफऔरऔर भी






