भारत की रेटिंग 19 साल से डूबी ही डूबी
2025-07-08
हमारी 146 करोड़ की आबादी में से 5-6 करोड़ लोगों को छोड़ दें तो बाकी 140 करोड़ बिंदास नहीं, बल्कि अंदर से हारे व भयग्रस्त लोग हैं। उन्हें खुद अपनी ताकत पर भरोसा नहीं। उनमें जीत का अहसास भरने के लिए कभी टीम इंडिया के किसी शुभमन गिल की डबल सेंचुरी चाहिए तो कभी अतीत का महिमागान, विश्वगुरु का बखान या भारत का दुनिया की पांचवी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाना और फिर जल्दी ही चौथे औरऔरऔर भी

