चुनावी लोकतंत्र की राजनीति में झूठ से सत्ता हासिल की जा सकती है क्योंकि जनता की याददाश्त लम्बी नहीं होती और भारत जैसे आस्था-प्रधान देश में लोगों को आसानी से भावनाओं में बहकाया जा सकता है। हालांकि यहां भी काठ की हांड़ी बार-बार नहीं चढ़ती। लेकिन अर्थनीति में झूठे दावे देश की आर्थिक बुनियाद को ही खोखला कर सकते हैं और सच उजागर होने पर सबसे तेज़ गति से बढ़ती हमारी अर्थव्यवस्था भी धराशाई हो सकती है।औरऔर भी