अहंकार, चीत्कार, डकार और हाहाकार
2024-04-15
सबसे ऊपर भोग व लिप्सा में डूबी सत्ता का अहंकार। उसके नीचे ईडी, सीबीआई व इनकम टैक्स के हमलों से हलकान विपक्ष की चीत्कार। उससे नीचे उन्माद में डूबे अंधभक्तों की जयकार। मंझधार में छोटी होती जा रही चादर में समाने के लिए पैर व पेट काटते आत्मलीन लोगों की डकार। और, सबसे नीचे बेरोज़गारी व महंगाई से त्रस्त जनता की हाहाकार। यही है आज विकास की ख्वाहिश में दौड़ते हमारे समाज का मौजूदा पिरामिड। चार दिनऔरऔर भी

