आज की सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि मोदी सरकार में कोई भी ऐसा व्यक्ति नहीं है जो अर्थव्यवस्था को भलीभांति समझता हो। सब कुछ नौकरशाहों और जी-हुजूरी करनेवालों के हवाले है। पीएमओ प्रधानमंत्री की सोच व कर्म का ही एक्सटेंशन है। जो भी मोदी की नहीं मानता, उसे जाना पड़ता है चाहे वो रिजर्व बैंक गवर्नर ऊर्जित पटेल हों या मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमणियन। ऐसे में अर्थव्यवस्था ऑटो-पायलट मोड में है या कहें तो राम-भरोसेऔरऔर भी