सच भरे आह, अर्थशास्त्री करते वाह-वाह
2023-12-08
कृषि पस्त, सेवाएं सुस्त। विकास के आंकड़े बेमानी है। राष्ट्रीय राजमार्गों से नीचे उतरकर गांवों की तरफ बढ़ते ही चमामक सड़कें खड्ढों से भर जाती हैं। डायरेक्ट बैंक ट्रांसफर की हकीकत असली लाभार्थियों से बात करने पर साफ हो जाती है कि प्रधान की कृपा से ही उनके बैंक खाते में धन आता है, जहां से निकालते ही प्रधान से लेकर ग्राम सचिव और ठेकेदार तक अपना हिस्सा खाने के लिए घेर लेते हैं। फिर भी सरकारीऔरऔर भी

