देश छोड़कर परदेशी बनते भारतीयों में रोज़ी-रोजगार के चक्कर में खाड़ी देशों से लेकर कनाडा तक बसनेवाले गरीब ही नहीं, बल्कि करोड़पति व अरबपति तक शामिल हैं और यह सिलसिला कहीं थमता नहीं दिख रहा। जून में आई हेनली प्राइवेट वेल्थ माइग्रेशन रिपोर्ट 2023 के मुताबिक इस साल भारत से 6500 ऐसे हाई नेटवर्थ व्यक्ति (एचएनआई) विदेश जाकर बसने की तैयारी में हैं जिनकी दौलत दस लाख डॉलर (8.2 करोड़ रुपए) से ज्यादा है। पिछले साल 2022औरऔर भी

कुत्ता पीछे पड़ जाए तो भागते-भागते दम निकल जाता है और धन पीछे पड़ जाए तो शेयर बाज़ार कुलांचे मारने लगता है। अपने शेयर बाज़ार का यही हाल है। विदेशी धन के पीछे पड़ने से बाज़ार नए ऐतिहासिक शिखर पर जा पहुंचा है। अकेले दो दिन में ही विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने अपने शेयर बाज़ार के कैश सेगमेंट में करीब 18,750 करोड़ रुपए की शुद्ध खरीद की है। जून महीने में उन्होंने इक्विटी में कुल 47,148औरऔर भी

भारतीय कृषि मानसून पर बहुत ज्यादा निर्भर है। मानसून में हुई शुरुआती देरी से खरीफ की फसलों की बोवाई लगभग 5% घट गई है। कृषि मंत्रालय के मुताबिक 23 जून तक देश में 129.52 लाख हेक्टेयर में बोवाई हुई है, जबकि पिछले साल यह रकबा 135.64 लाख हेक्टेयर का था। महाराष्ट्र में कपास का रकबा घटने की खबरें आ रही हैं। अल निनो का नकारात्मक असर धान, गन्ना, मोटे अनाज व दालों तक पर पड़ना तय है।औरऔर भी