अच्छी बात यह है कि अपने यहां ग्रेजुएट युवक-युवतियां थक-हारकर घर बैठ जाने के बजाय नौकरी मांगने के लिए श्रम बाज़ार में पहले से ज्यादा उतरने लगे हैं। हालांकि आमतौर पर काम मांगनेवाले श्रमिकों का श्रम बाज़ार में आना घटा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, देश में श्रम भागीदारी की दर (एलपीआर) वित्त वर्ष 2016-17 में 46.2% हुआ करती है। यह बीते वित्त वर्ष 2022-23 में घटकर 39.5% पर आ गई है। लेकिन बेरोज़गारी की ऊंची दरऔरऔर भी