शेयरों के भाव बढ़ते हैं क्योंकि धन उनका पीछा करता है। धन उनका पीछा किसी खबर या अनुमान की वजह से करता है। इस चक्र में खबर की खास अहमियत है। लेकिन शेयर बाज़ार में कोई खबर सार्वजनिक रूप से ही सबके लिए बाहर आती है। अप्रकाशित या अघोषित खबर पर ट्रेडिंग करना इनसाइडर ट्रेडिंग हैं और ऐसा करना दंडनीय अपराध है। लेकिन अपने यहां खुद कंपनी प्रवर्तक ही अपने शेयरों में खेल करते और करवाते हैं।औरऔर भी

शेयर बाज़ार की ट्रेडिंग अंततः विशुद्ध रूप से शत-प्रतिशत सट्टेबाज़ी है, भले ही हम उसे वित्तीय आज़ादी पाने, अपना बॉस खुद बनने या मुद्रास्फीति से लड़ने के माध्यम जैसा कितना भी सम्मानजनक नाम क्यों न दे दें। इसे हर किसी को स्वीकार करना ही पड़ेगा। इसके बाद असली मसला यह बचता है कि इस सट्टेबाज़ी के तत्व को कम से कम करने के लिए हम बाज़ार में सक्रिय शक्तियों के संतुलन की संभाव्य समझ किस हद तकऔरऔर भी

हर कोई शेयर बाज़ार में निवेश या ट्रेडिंग इसीलिए करता है कि जब शेयरों के भाव बढ़ेंगे तो बेचकर मुनाफा कमा लेंगे। यह अलग बात है कि इसी बाज़ार में कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो शेयरों के भाव गिरने पर कमाते हैं। लेकिन उनका पूरा तंत्र और तरीका अलग है। फिलहाल तो अहम सवाल यह है कि शेयरों के भाव क्यों बढ़ते हैं? जवाब है कि इसके पीछे धन की महिमा है। धन जिन शेयरोंऔरऔर भी

शेयर बाज़ार से बिना धांधली या घोटाले के कितना कमाया जा सकता है इसकी मिसाल हैं राकेश झुनझुनवाला। अब वे इस दुनिया में नहीं हैं। लेकिन उनकी सीख भारत के सभी निवेशकों व ट्रेडरों के लिए प्रतिमान है। बाप मुंबई में इनकम टैक्स कमिश्नर थे तो धन-दौलत और शान-ओ-शौकत की कोई कमी नहीं थी। लेकिन बेटे को शेयर बाज़ार में लगाने के लिए पैसे देने से मना कर दिया और हिदायत दी कि वो दोस्तों से भीऔरऔर भी