सरकार अगर सुनने व गुनने को तैयार हो तो संकट से निकलने की सटीक राह बतानेवालों की कोई कमी नहीं है। तमाम अर्थशास्त्री बराबर लिखते रहे हैं। इनके सुझावों का सार यह है कि अभी तक हम देश के शीर्ष 10-15 करोड़ लोगों को ध्यान में रखकर उत्पादन करते रहे हैं। अर्थव्यवस्था का फोकस विदेश के बजाय अगर 125 करोड़ लोगों के घरेलू बाज़ार पर हो तो देश का उद्धार हो सकता है। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी