ठीक उस वक्त, जब लग रहा था कि हमारी अर्थव्यवस्था बुरे दिनों को पीछे छोड़कर नया उभार पकड़ने जा रही है, तभी कोरोना वायरस के विश्वव्यापी प्रकोप ने सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। उसकी हालत अब चाकू की धार पर चलने जैसी हो गई है। ज़रा-सा चूके तो सीधे गहरी घाटी में। कुछ आलोचक तो यहां तक कहने लगे हैं कि अर्थव्यवस्था की हालत 1991 के आर्थिक संकट जैसी हो गई है। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी