इस बार का त्योहारी सीज़न खराब रहा। आम उपभोक्ता से लेकर उनके लिए सामान बनानेवाली कंपनियों के लिए। फिर भी इसे तात्कालिक मामला मानकर छोड़ा जा सकता है। लेकिन जब देश मे डीजल से लेकर बिजली तक की मांग घट रही हो और आंकड़े इसकी तस्दीक कर रहे हों तो यह गंभीर चिंता का मसला बन जाता है। शेयर बाज़ार भले ही ऊपर से बेफिक्र दिखे, लेकिन अंदर-अंदर उसकी भी हालत खराब है। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी